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अपनी ही शिष्या के साथ दुष्कर्म के आरोपी दाती महाराज के खिलाफ एक एनजीओ की ओर से दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने संज्ञान लेने से इंकार कर दिया है। इस याचिका में दाती महाराज से जुड़े रेप के एक मामले की जांच पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंपने की मांग की गई थी।

कोर्ट ने कहा, ‘आपकी लगाई गई जनहित याचिका को क्रिमिनल रिट पिटीशन में तब्दील कर दिया गया है. लिहाज़ा, इस मामले में पीड़ित लड़की को इस मामले में याचिकाकर्ता बनाया जाए.’ बता दें कि याचिका एक एनजीओ ने लगाई थी। लिहाज़ा कोर्ट का सवाल था कि बिना प्रभावित पक्ष को पार्टी बनाए याचिका पर सुनवाई कैसे की जा सकती है।

दिल्ली सिटिजन फोरम फॉर सिविल राइट्स के वकील जोगिंदर तुलीजनहित ने अपनी याचिका में कहा है कि दाती महाराज के यहां शनिधाम पर कुछ बड़े लोगों का आना जाना लगा रहा है। और पुलिस के अब तक जांच ठीक से न करने का एक कारण ये भी हो सकता है। अब तक दाती की गिरफ्तारी न होने के कारण इस मामले से जुड़े सबूतों और गवाहों को दाती महाराज प्रभावित कर सकता है।

न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने कहा कि इस आपराधिक मामले में एनजीओ पीड़ित नहीं है और वह किस हैसियत से दखल दे रहा है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कहा है पीड़िता को पक्ष बनाने के बाद दोबारा हाइकोर्ट में याचिका लगाई जा सकती है।

गौरतलब है कि गत 7 जून को दुष्कर्म के आरोप में दाती महाराज के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। लेकिन एक महिना बीत जाने के बाद भी दाती महाराज की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

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