नई दिल्ली | पिछले एक साल से प्रधानमंत्री मोदी और केन्द्रीय कपडा मंत्री स्मृति ईरानी की शैक्षिक योग्यता को लेकर खूब हो हल्ला हो रहा है. विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है की स्मृति ईरानी और मोदी की डिग्री फर्जी है. इसलिए वो इन्हें सार्वजानिक करने से डर रहे है. इसी हंगामे के बीच एक आरटीआई एक्टिविस्ट ने स्मृति ईरानी के स्कूल रिकॉर्ड के बारे में जानकारी मांगनी चाही लेकिन CBSE ने उनकी मांग को ठुकरा दिया.

आरटीआई एक्टिविस्ट द्वारा केन्द्रीय सूचना आयोग में अपील करने के बाद CIC ने CBSE को स्मृति ईरानी के स्कूल रिकार्ड्स की जांच करने का आदेश दिया. CIC के आदेश को CBSE ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी. जिस पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने CIC के आदेश पर रोक लगा दी. जस्टिस संजीव सचदेवा ने CIC के 17 जनवरी को दिए गए आदेश पर रोक लगाते हुए आरटीआई आवेदक को भी नोटिस जारी कर दिया.

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कोर्ट ने आरटीआई आवेदक को 27 अप्रैल तक अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है. इसी दिन मामले पर आगे की सुनवाई की जाएगी. हाई कोर्ट का आदेश स्मृति ईरानी के लिए राहत लेकर आया है क्योकि केन्द्रीय सूचना आयोग ने CBSE की सभी दलीलों को ख़ारिज करते हुए कहा था की अगर कोई जनप्रतिनिधि , चुनाव लड़ते समय अपनी शैक्षिक योग्यता के बारे में कोई घोषणा करता है तो मतदाता को उस घोषणा की जांच करने का भी अधिकार है.

दरअसल CBSE ने आरटीआई आवेदक की आरटीआई को ख़ारिज करते हुए दलील दी थी की आरटीआई के तहत स्मृति ईरानी के स्कूल रिकार्ड्स की जानकारी नही दी जा सकती क्योकि यह जानकारी निजी है और तीसरे पक्ष की निजी जानकारी विश्वास के आधार पर हमारे पास रखी गयी है. CBSE की इस दलील को CIC ने ख़ारिज करते हुए कहा था की प्रवेश पत्र पर लिखा फ़ोन नम्बर, ईमेल आईडी और पता निजी सूचना है लेकिन बाकी रिकार्ड्स को निजी सूचना के तौर पर नही लिया जा सकता.

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