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केरल बीते 100 सालों की सबसे बड़ी बाढ़ का सामना कर रहा है। ऐसे में दरगाह आला हजरत की और से देश भर के मुसलमानों ने नफ्ली कुर्बानी के पैसों से बाढ़ पीड़ितों की मदद करने की अपील की गई।

दरगाह के सज्जादानशीन और तहरीक-ए-तहफ्फुज-ए-सुन्नियत (टीटीएस) के मरकजी सदर मुफ्ती अहसन रजा कादरी (अहसन मियां) नेकहा कि ईद-उल-अजहा हमें अल्लाह की राह में कीमती चीजें कुर्बान करने का पैगाम देता है। केरल में बाढ़ से लाखों लोग बेघर हैं। उनकी आर्थिक मदद के लिए जो भी जुड़े, उसे केरल भेजें।

सज्जादानशीन ने कहा कि बकरीद पर कुर्बानी के बाद पशुओं की जो खाल (चमड़ा) हो, उसकी बिक्री कर केरल में बाढ़ पीड़ितों की मदद करें। उन्होने कहा, इस वक्त केरल में सैलाब से बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है। वहां अवाम मुश्किल में है। खाने, पीने, रहने और दवाओं की सख्त जरूरत है। लाखों की तादाद में लोग शिविरों में पनाह लिए हैं। वे मदद के लिए हमारी ओर देख रहे हैं। लिहाजा हमारा यह फर्ज कि उनकी मदद करें।

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उन्होंने कहा कि हमारे मुल्क और मजहब की यही खूबसूरती है कि मुसीबत में सब साथ खड़े होते हैं। उन्होंने कुर्बानी के फोटो सोशल मीडिया पर डालने से परहेज करने को कहा है साथ ही उन्होंने कुर्बानी के बाद न खाए जाने वाले अंगों और खून को खुले में डालने से मना किया है।

सज्जादानशीन ने बताया, क़ुर्बानी हमें शिक्षा देती है कि जिस तरह भी हो अल्लाह की राह में अपने माल को क़ुर्बान कर दो। इस्लाम मे इस ईद को “ईद-उल-अज़हा” कहा गया है। ईद के मायने है मुसलमानों के खुशी का दिन और अज़हा के मायने है क़ुर्बानी। अल्लाह के रसूल ने इरशाद फरमाया की मालिके निसाब होने के बाद भी क़ुर्बानी न करे तो वो हमारी ईदगाह के करीब न आये।

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