प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार को पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ के पदाधिकारियों सहित उसके छात्रों के विंग कैम्पस फ्रंट के खिलाफ अपनी पहली चार्जशीट दायर की.

पत्रकार सिद्दीक कप्पन और तीन अन्य लोगों जो कथित तौर पर पीएफआई और सीएफआई से जुड़े है. जिसमे अतीकुर्रहमान, मसूद अहमद और मोहम्मद आलम के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत आरोप पत्र दायर किया गया.  – जिन्हें हाथरस यात्रा के दौरान 5 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया था।

चार्जशीट में केए रऊफ शेरिफ का उल्लेख किया गया है, जो कथित तौर पर दोनों संगठनों से जुड़े हुए हैं. आरोपपत्र लखनऊ की विशेष अदालत ने स्वीकार कर लिया है. अज्ञात अधिकारियों ने पीटीआई को बताया कि अदालत ने 18 मार्च को पेश होने के लिए पांच आरोपियों को समन जारी किया है.

ईडी ने एक बयान में कहा कि एजेंसी की जांच से पता चला है कि हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, 100 करोड़ रुपये से अधिक पीएफआई के खातों में जमा किए गए हैं, जो कि एक बड़ा हिस्सा है. इसने आगे कहा कि पीएफआई और सीएफआई की गैरकानूनी गतिविधियों में नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ फंडिंग का विरोध भी शामिल है, जिससे फरवरी 2020 में दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा हुई और हाथरस में सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास किया गया.

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया एक केरल-आधारित संगठन है जिसे उत्तर प्रदेश सरकार ने विवादास्पद नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा में शामिल होने के लिए प्रतिबंधित करने की मांग की है.

प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि इसकी जांच में पाया गया कि इन पीएफआई / सीएफआई के सदस्यों का दौरा [हाथरस] राउफ शेरिफ के निर्देशों के तहत था और उसी के लिए धन भी उसके द्वारा प्रदान किया गया था.

मनी लॉन्ड्रिंग के लिए अपना मामला बनाते हुए, आरोप पत्र में आरोप लगाया गया कि रऊफ शरीफ ने खाड़ी देशों में तैनात पीएफआई सदस्यों के साथ एक आपराधिक षड्यंत्र में प्रवेश किया, “व्यापार के लेन-देन से संबंधित भुगतानों की आड़ में पीएफआई द्वारा विदेशों में जमा / एकत्रित किए गए धन को हस्तांतरित करने के लिए,”

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