मिशन 2019 में जुटी भाजपा ने बीते 4 सालों में की गई भड़काऊ और नफरत भरी बयानबाजी और सरकार की नीतियों के खिलाफ जाने वाले आर्टिकल मीडिया से हटाने शुरू कर दिये है। यह सनसनीखेज दावा सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने लगाया है।

अपनी रिपोर्ट “Dismantling India- A four year report” में मानवाधिकार कार्यकर्ता शबाना हाशमी, लीना दाबिरु और डॉ. जॉन दयाल ने दावा किया कि भाजपा नेताओं की तरफ से दिए गए विवादित बयान, अल्पसंख्यकों के खिलाफ दिए गए भड़काऊ भाषण, दंगों की जानकारी, संघ और भाजपा के खिलाफ लिखे संपादकीय को न केवल इंटरनेट से बल्कि अखबारों में से भी हटाया जा रहा है।

मानवाधिकार कार्यकर्ता और ANHAD (Act Now for Harmony and Democracy) की संस्थापक सदस्य शबाना हाशमी का कहना है कि इंटरनेट पर संगठित तरीके से सफाई अभियान चलाया जा रहा है। मिस्टर मोदी के भाषण यू-ट्यूब से 2014 से पहले ही हटा दिए गए थे। गौरव यात्रा के दौरान जो उन्होंने जहर उगला, वह सब भी हटा दिया गया है। अब ये लोग मोदी, आरएसएस और भाजपा के खिलाफ लिखे गए आर्टिकल्स, एडिटोरियल को हटाया जा रहा है।

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सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ता लीना डाबिरु का कहना है कि जब हम अपने डाटा को कम्पाईल कर रहे थे, तो हमें पता चला कि कई विवादित बयानों को इंटरनेट से हटा दिया गया है। इसके साथ ही द हिंदू, टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स, द इंडियन एक्सप्रेस जैसे बड़े पेपरों में मौजूद आर्टिक्लस को भी हटा दिया गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस कदम के जरिए भाजपा चुनाव से पहले अपनी छवि सुधारना चाहती है, ताकि वे बातें फिर से सामने ना आएं और पार्टी को इसका फायदा मिल जाए। बता दें कि डिस्मेंटेलिंग इंडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि भाजपा के मौजूदा 28 एमएलए और एमपी नफरत भरी बयानबाजी कर चुके हैं।