Friday, September 24, 2021

 

 

 

हाशिमपुरा केस: यूपी पीएसी के 16 जवानों में से सिर्फ 4 ने किया सरेंडर

- Advertisement -
- Advertisement -

देश की सबसे बड़ी मुसलमानों की कस्टोडियल मौत के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट अपना फैसला सुना चुकी है। यूपी के 15 रिटायर्ड और कार्यरत पीएसी जवानों को दोषी ठहराया गया है। इस मामले में पीएसी के 4 जवानों ने तीस हजारी कोर्ट में गुरुवार को सरेंडर कर दिया। कोर्ट ने बाकी बचे आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वॉरंट जारी किया है।

16 दोषियों में जिन 4 जवानों ने सरेंडर किया उनके नाम हैं – निरंजन लाल, महेश, समीउल्ला और जयपाल। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने चारों को तिहाड़ जेल में भेज दिया। बता दें कि कोर्ट ने जवानों को सरेंडर करने के लिए 22 नवंबर तक का वक्त दिया गया था।

हाशिमपुरा में यूपी पीएससी के जवानों ने 2 मई 1987 को 42 मुस्लिम युवकों की हत्या कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मामले को 2002 में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में ट्रांसफर किया गया। वर्ष 2006 में आरोप तय हुए। अभियोजन पक्ष की ओर से 91 लोगों की गवाही हुई।

लेकिन तीस हजारी कोर्ट से पीएसी के सभी जवान बरी हो गए. उसके बाद मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा। दिल्ली हाईकोर्ट ने तीसहजारी कोर्ट के फैसले को पलटते हुए पीएससी के 16 जवानों को दोषी करार दे दिया। हाई कोर्ट ने इन सभी को उम्र कैद की सजा सुनाई और इन पर 10 हजार का जुर्माना भी लगाया।

दिल्ली हाईकोर्ट के इस आदेश को सुनाते ही इस मामले में सभी को मिली जमानत रद्द हो गई और कोर्ट ने उन सभी को 22 नवंबर को कोर्ट के सामने सरेंडर करने का आदेश दिया। फैसले में एडिशनल सेशन जज संजय जिंदल ने कहा कि यह बहुत तकलीफदेह है कि कुछ निर्दोष लोगों को इतनी यंत्रणा झेलनी पड़ी और एक सरकारी एजेंसी ने उनकी जान ली।

पीएसी के जवानों ने इस कांड को अंजाम दिया जिसमें 78 वर्षीय गवाह रणबीर सिंह बिश्नोई ने एक केस डायरी सौंपी थी। इस केस डायरी में कथित रूप से शामिल सभी पीएसी के जवानों के नाम शामिल हैं। डायरी में 1987 में मेरठ पुलिस लाइंस में तैनात पीएसी कर्मियों के नाम दर्ज हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles