पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के पिलखुआ थाना स्थित मदापुर गांव में कथित गोहत्या के आरोप में की गई बेदर्दी से पिटाई के दौरान मोहम्मद क़ासिम की मौत हो गई थी और मोहम्मद समीउद्दीन बुरी तरह जख़्मी हुए थे।

मामले के चश्मदीद और पीड़ित मोहम्मद समीउद्दीन ने अपनी जान को खतरा बताते हुए पुलिस सुरक्षा की मांग की थी। जिसके बाद उन्हे उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक गनमैन उपलब्ध करा दिया है। हालांकि उनके अब तक ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज नहीं हुए है।

समयदीन ने 14 जुलाई को भेजे अपने पत्र में मेरठ रेंज आईजी राम कुमार से मांग की थी, “मैं घटना का सच्चा और सही वर्णन करना चाहता हूं और इसलिए मेरा अनुरोध है कि मेरा बयान ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के आगे रिकॉर्ड किया जाए।” इस पर अभी तक पुलिस ने कोई कदम नहीं उठाया है, जिसके चलते समयदीन के परिजन में खौफ का माहौल बना हुआ है।

हालांकि मेरठ आईजी ने यह माना कि उन्हें समीउद्दीन, उनके भाई यासीन और दिनेश तोमर द्वारा इमेल से भेजा गया पत्र मिल गया है। लेकिन उन्होंने आगे की कार्रवाई के बारे में अभी तक कोई स्थिति स्पष्ट नहीं की है। इस बीच उत्तर प्रदेश पुलिस ने यह ट्वीट किया है कि इस मामले में रिपोर्ट समयदीन के भाई के हस्ताक्षर के साथ दर्ज की गई है और उसे लिखा दिनेश तोमर ने है।

वहीं सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने सवाल उठाया कि “उत्तर प्रदेश पुलिस अभी तक यह नहीं बता पाई कि जब मॉब लिंचिग का वीडियो उसके पास था, तो उसने मोटरसाइकिल हादसे का मामला कैसे दर्ज किया? इस वीडियो में मृतक कासिम और चश्मदीद गवाह समयदीन दोनों को मारते हुए लोग दिखाई दे रहे हैं, गाय के नाम पर पिटाई कर रहे हैं, फिर मामला रोड रेज का कैसे और क्यों बनाया गया। अब तक समयदीन का बयान ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने क्यों नहीं लिया गया।”