पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने एक बार फिर से कहा कि देश के मुसलमान असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘मुस्लिम चिंतित हैं। अल्पसंख्यकों में असहजता की भावना है और इस मुद्दे को संबोधित किए जाने की जरूरत है।’

टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में जब उनसे पूछा गया कि क्या प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर संबोधित करना चाहिए, तो उन्होंने कहा, ‘मैं कोई नहीं हूं, जो पीएम को बताए कि उन्हें क्या कहना चाहिए और क्या नहीं। एक नागरिक के तौर पर, चाहे मेरा कोई भी नाम हो, राज्य, आस्था या खानपान हो, मेरे वे सभी अधिकार और जिम्मेदारियां हैं, जो किसी और के हैं। देश का मुस्लिम नागरिक अब भी देश का मुस्लिम नागरिक है। भारत में, मुसलमान दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम बॉडी हैं।’

उनसे पूछा गया कि क्या वह अमर्त्य सेन से सहमत हैं कि ‘आइडिया ऑफ इंडिया’ खतरे में है? इस पर पूर्व उप राष्ट्रपति ने कहा, ‘पूरी तरह सहमत हूं। ‘आइडिया ऑफ इंडिया’ तनाव से गुजर रहा है। आइडिया ऑफ इंडिया मिश्रित समाज है। मिश्रित समाज कानून द्वारा स्थापित नहीं है। बल्कि समाज ने इसे खुद स्थापित किया है।’

AMU में जिन्ना विवाद पर उन्होने कहा, ‘यह एक पुरानी परंपरा है कि स्टूडेंट यूनियन पब्लिक पर्सनैलिटी का सम्मान किया जाता है। पहली बार मोहनदास करमचंद गांधी का सम्मान किया गया था। जिसका भी सम्मान होता है, उसकी तस्वीर वहां लगाई जाती है। पीएम मोरारजी देसाई, मदर टेरेसा, खान अब्दुल गफ्फार खान का सम्मान किया गया और इनकी तस्वीर लगाई गई। जिन्ना का भी सम्मान किया गया और उनकी तस्वीर लगाई गई। वह करीब 1983 के आसपास वहां गए थे। उनकी तस्वीर वहां होने में बुराई क्या है?

उन्होने सवाल उठाया कि, अगर विक्टोरिया मेमोरियल हो सकता है तो जिन्ना की तस्वीर क्यों नहीं हो सकती है। हमारी परंपरा इस तरह भवनों और तस्वीरों पर हमला करने की नहीं रही है।’

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