haji mehbub

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आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशकंर के सुलह-समझौते के प्रस्ताव के चलते बाबरी मस्जिद की जमीन राम मंदिर निर्माण की वकालत करने वाले मौलाना मौलाना सलमान हुसैनी नदवी के नक्शेकदम पर अब हाजी महबूब ने भी चलना शुरु कर दिया है.

अयोध्या मामले के पक्षकार हाजी महबूब ने बुधवार को कहा कि अगर श्री श्री के माध्यम से सुलह वार्ता से मंदिर-मस्जिद का विवाद हल कर लिया जाए तो इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी व श्री श्री के प्रयास से सार्थक पहल हो सकती है. उन्होंने कहा, 1992 से कभी भी वे इस मसले में नहीं आए हैं मैं उनकी इज्जत करता हूं.

इस दौरान हाजी ने ये भी कहा कि  ‘मुझे बताया गया है कि ओवैसी कह रहे हैं कि हम उनके साथ हैं लेकिन यह सही नहीं है, हम लोग उनके साथ नही हैं. जो फैसला यहां के मुसलमानों ने किया था वह उनका अपना फैसला है.’ उन्होंने कहा, इस मामले में मेरी उनसे (ओवैसी) कोई बात भी नहीं हुई है. वे मुस्लिम लीडर हैं, अच्छे वक्ता हैं, लेकिन यह मामला वह न उठाएं तो अच्छा है. अयोध्या के लोग मिलकर यह मसला हल करें तो अच्छा है। नहीं तो अदालत जो फैसला देती है वह मानेंगे.

ध्यान रहे बीते दिनों ही हाजी महबूब के आवास पर इस सबंध में बैठक हुई थी. जिसमे बाबरी केस के मुद्दई और मरहूम हाशिम अंसारी के बेटे इकबाल अंसारी भी शामिल हुए थे. बैठक में फैसला हुआ था कि विवादित जमीन पर केवल मस्जिद ही बनेगी और इस मामले में कोई समझौता नहीं होगा.

बैठक के बाद इकबाल अंसारी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, ‘अयोध्या के मुसलमानों की मांग है कि जहां बाबरी मस्जिद थी, वहीं बनाई जाए. इसी विषय को लेकर यह मीटिंग हुई है. इसमें मुस्लिम समाज के सारे लोग बुलाए गए. हाजी महबूब हैं मौके पर हम भी हैं और अयोध्या के तमाम लोग हैं.’

उन्होंने कहा कि बैठक में यह तय हुआ है कि कोई समझौता नहीं मानेंगे.. मस्जिद उसी स्थान के अलावा और कहीं नहीं हो सकती. इस मामले में कोर्ट का जो फैसला होगा, वह माना जाएगा.

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