सोमवार को केरल के चर्चित केस में सुप्रीम कोर्ट में अखिला उर्फ हादिया की पेशी हुई. चीफ जस्टिस की बेंच के समक्ष हादिया ने अपने पति के साथ रहने की ख्वाहिश जाहिर की.

सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई जस्टिस दीपक मिश्रा ने हादिया से पूछा कि आपके भविष्य के प्लान क्या है, हादिया ने कहा कि मुझे आजादी चाहिए. उन्होंने सवाल किया कि क्या आप राज्य सरकार के खर्चे पर अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं? जवाब में हादिया ने कहा- ? मैं जारी रखना चाहती हूं कि लेकिन राज्य के खर्चे पर नहीं जबकि मेरे पति इसका खर्चा उठा सकते हैं.”

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इस दौरान हादिया के पति शैफी जहान की ओर से पक्ष रखते हुए कांग्रेस नेता और वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि हम हदिया की बात नहीं सुन रहे हैं बल्कि मीडिया में चलाई जा रही खबरों की बात मान रहे हैं. उन्होंने कहा- जब हादिया यहां थी तो कोर्ट को उसकी बात सुननी चाहिए ना कि एनआईए की. उसे अपनी जिंदगी का फैसला लेने का हक है.

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या इस तरह के कभी हालात हो सकते हैं कि जब कोई बालिग भी जो फैसला ले रहा हो वह फैसला लेते वक्त अपना दिमाग का इस्तेमाल ना कर पा रहा हो. कोर्ट ने आगे कहा, हम यह नहीं कह रहे हैं कि आप के मामले में भी ऐसा हुआ है लेकिन कुछ एक मामले ऐसे भी होते हैं जहां पर एक बालिग व्यक्ति भी सोच समझ कर फैसला लेने में सक्षम नहीं होता.

कपिल सिब्बल ने कहा कि इसको धार्मिक रंग नही दिया जाना चाहिए. ये हादिया की ज़िंदगी है उसको फैसला लेने का अधिकार है. अगर ये भी मान भी लिया जाए कि हादिया ने जिस से निकाह किया वह गलत इंसान है लेकिन फिर भी अगर वह उसके साथ रहना चाहती है कि उसकी मर्जी है. सिब्बल ने कहा कि यहां पर यह मुद्दा नहीं है कि वह बालिग है और और क्या वह किसी दबाव में है या नहीं. यहां मुद्दा यह है कि क्या उसको इस तरह से हिरासत में रखा जाना चाहिए?

इस बीच एनआईए ने सुप्रीम कोर्ट में 100 पन्नों की रिपोर्ट सौंप दी है. अब इस मामले की सुनवाई मंगलवार को होगी.

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