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नई दिल्ली । गुजरात और हिमाचल प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे आ गए है। दोनो ही प्रदेश में भाजपा को बहुमत प्राप्त हुआ है। लेकिन गुजरात की जीत भाजपा के लिए ज़्यादा मायने रखती है। प्रदेश में फैले असंतोष के बीच दोबारा सत्ता में वापसी करना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती थी। इस बात से भाजपा का शीर्ष नेतृत्व भी वाक़िफ़ था, यही वजह थी कि उन्होंने गुजरात चुनाव में अपनी पूरी ताक़त झोंक दी। ख़ुद प्रधानमंत्री मोदी ने चुनावों में ख़ुद को झोंक दिया। उन्होंने प्रदेश में 34 रैलिया की। हालाँकि इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी पूरी मज़बूती के साथ अपनी बातें रख रहे थे।

यही नही उनको सुनने के लिए जनता उनकी रैलियों में आ रही थी। पीछले 22 सालों में ऐसा पहली बार देखा गया जब भाजपा बैकफूट पर नज़र आ रही थी। पहली बार उस गुजरात मॉडल पर सवालिया निशान लग रहे थे जिसको आगे कर भाजपा ने केंद्र की सत्ता पर क़ब्ज़ा किया था। इन चुनावों में उसी गुजरात मॉडल को कांग्रेस ने आगे कर मोदी सरकार से सवाल पूछे जिसका गुजरात की जनता ने भी साथ दिया। यही वजह थी की भाजपा नही चाहती की थी की गुजरात में विकास की चर्चा हो इसलिए मोदी ने अपनी रैलियों में भावनाओं को आगे कर दिया।

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इसमें उनका साथ कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने दिया। मणिशंकर ने मोदी को नीच बोल दिया जिसको प्रधानमंत्री जी ख़ूब भुनाया। हालाँकि उस समय कहा गया कि यह चुनाव यही से भाजपा के पक्ष में चला गया है। लेकिन जब नतीजे आने शुरू हुए तो स्पष्ट हो गया कि गुजरात की जनता ने उन मुद्दों को ज़्यादा अहमियत नही दी। जो गुजरात भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी का गृह राज्य है, वहाँ पर भाजपा को भारी नुक़सान हुआ है। पीछले 27 सालों में यह भाजपा का सबसे ख़राब प्रदर्शन है।

150 से अधिक सीटों का दावा करने वाले अमित शाह के लिए ये परिणाम केवल सांत्वना भर है क्योंकि उनको भी पता है की भले ही भाजपा को बहुमत मिल गया है लेकिन 15-20 ऐसी सीटें रही है जहाँ भाजपा की जीत का अंतर 200 से 2000 के बीच रहा है। अगर यहाँ कांग्रेस के रणनीतिकारो का प्रबंधन सही रहता तो आज परिणाम कुछ और हो सकते थे। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा की करारी हार हुई है।

यही नही राज्य सरकार के कई मंत्री चुनाव हार गए है। इसलिए गुजरात में हुई इस जीत पर जश्न मनाकर भाजपा केवल अपने आप को सांत्वना दे रही है और इसमें मीडिया उनका साथ दे रहा है। जहाँ ज़्यादातर मीडिया में गुजरात जीत को मोदी का मैजिक बताया जा रहा है वही वह इस बात को सामने रखने से हिचक रहे है की कांग्रेस ने मोदी के गढ़ में सेंधमारी की है। इसलिए राहुल गांधी को इन चुनावों के बाद सीरे से नकारना भाजपा की एक बड़ी भूल साबित हो सकती है।

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