प्रसिद्ध इतिहासकार और जीवनी लेखक रामचंद्र गुहा अहमदाबाद विश्वविद्यालय के साथ नहीं जुड़ेंगे। उन्होने ये फैसला अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के विरोध के बाद लिया है। गुहा ने ट्वीट करके विश्वविद्यालय जॉइन नहीं करने की जानकारी दी।  उन्हें 1 फरवरी 2019 को विश्वविद्यालय जॉइन करना था।

इससे पहले गुहा ने मंगलवार को एक बयान में कहा, “मैं अहमदाबाद को तब से जानता और पसंद करता हूं, जब मैं 40 साल पहले यहां आया था और अब मैं वापस उस शहर में पढ़ाने और कार्य करने जा रहा हूं, जहां महात्मा गांधी ने अपना घर बनाया था और स्वतंत्रता आंदोलन को पोषित किया था। इस बात ने मुझे अधिक उत्साहित किया है।”

उन्होंने कहा, “अहमदाबाद की उच्च शिक्षा के क्षेत्र में लोक परोपकार भावना की महान परंपरा रही है और अहमदाबाद विश्वविद्यालय उस परंपरा का एक प्रसिद्ध और नया विस्तार है।” गुहा ने कहा, “अहमदाबाद विश्वविद्यालय में बतौर शिक्षक के रूप में शामिल होने पर मैं बहुत खुश हूं। मैं विश्वविद्यालय के अंतर-अनुशासन दृष्टिकोण, इसके बुद्धिमान पुराने और अच्छे युवा शिक्षकों और इसके दूरदर्शी नेतृत्व के मिश्रण से बहुत प्रभावित हुआ हूं।”

एबीवीपी के शहर सचिव प्रवीण देसाई ने द इंडियन एक्सप्रेस से बताया, ‘हमने अहमदाबाद यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार बीएम शाह को एक ज्ञापन सौंपा था। हमने कहा था कि हमें हमारे शैक्षिक संस्थानों में प्रबुद्ध जनों की जरूरत है, राष्ट्रविरोधियों की नहीं। इन्हें शहरी नक्सली भी कहा जा सकता है। हमने रजिस्ट्रार के सामने गुहा की किताबों में छपी देश विरोधी बातें भी रखीं।

हमने उन्हें बताया कि जिस शख्स को आप बुला रहे हैं, वो एक कम्युनिस्ट है। अगर उन्हें गुजरात बुलाया जाता है तो जेएनयू की तरह ही एक देश विरोधी भावना पनप सकती है।’