Thursday, September 23, 2021

 

 

 

1984 सिख दंगों के फैसले में गुजरात दंगों का भी जिक्र, अदालत ने माना – अपराधी बच निकले

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साल 1984 में सिख विरोधी दंगे में कांग्रेस के दिग्गज नेता सज्जन कुमार को दिल्ली हाईकोर्ट ने दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सज़ा सुनाई।  उन्हें 31 दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश दिया गया है। सज्जन को आपराधिक साजिश और दंगा भड़काने का दोषी पाया गया।

इस मामले में न्यायमूर्ति एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति विनोद गोयल की पीठ ने फैसला सुनाते हुए 1993 के मुंबई दंगा, 2002 के गुजरात दंगा, 2008 के कंधमाल हिंसा और 2013 के मुजफ्फरनगर हिंसा में अल्पसंख्याकों की बड़े पैमाने पर हत्या का भी जिक्र किया।

कोर्ट ने कहा कि सिख विरोधी दंगा में ठीक उसी तरह बड़े पैमाने पर लोगों की हत्या की गई, जैसे अन्य दंगों में अल्पसंख्यको को निशाना बनाया गया। अपराधियों ने राजनीतिक संरक्षण का उपयोग किया और बच निकले। इन अपराधियों को सजा देना यह हमारे कानूनी प्रक्रिया के लिए एक बड़ी चुनौती है।

अदालत ने इस मामले में कांग्रेस के पूर्व पार्षद बलवान खोखर, सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी भागमल, गिरधारी लाल, पूर्व विधायक महेंद्र यादव और कृष्ण खोखर की दोषिसद्धि भी बरकरार रखी और अलग-अलग सजाएं सुनाईं। इन्हें दंगों के दौरान सिखों के घरों और एक गुरुद्वारे में आग लगाने की साजिश रचने का दोषी भी पाया गया।

अदालत ने उन्हें भी 31 दिसम्बर तक आत्मसमर्पण करने और शहर छोड़कर ना जाने का निर्देश दिया है। आदेश सुनाते हुए पीठ ने निचली अदालत में दोषी ठहराए गए पांच लोगों की ओर से दायर याचिकाएं भी खारिज कर दीं। निचली अदालत ने भी इन्हें दोषी ठहराया था।

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