गुजरात दंगा: SC का बिलकिस बानो को नौकरी, घर और 50 लाख रु. मुआवजा देने का निर्देश

6:55 pm Published by:-Hindi News

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को निर्देश दिए है कि 2002 गुजरात दंगों में दुष्कर्म पीड़ित बिलकिस बानो को 50 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए। अदालत ने मंगलवार को गुजरात सरकार से कहा कि वह नियमों के मुताबिक बिलकिस बानो को एक सरकारी नौकरी और आवास भी मुहैया कराए।

सुप्रीम कोर्ट ने सबूत मिटाने के लिए आईपीएस आरएस भगोरा को दो पद डिमोट करने की राज्‍य सरकार की सिफारिश को मान लिया है। भगोरा आगामी 31 मई को रिटायर होने जा रहे हैं। सुनवाई के दौरान गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कदम उठाए गए हैं।

फैसले के दौरान गुजरात सरकार ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई वाली बेंच को बताया कि बांबे हाई कोर्ट की ओर से दोषी करार दिए गए अधिकारियों के पेंशन लाभ रोक दिए गए हैं। साथ ही एक आईपीएस अफसर भगोरा को दो पद डिमोट कर दिया गया है। इस दौरान अदालत ने गुजरात सरकार से कहा कि खुद को किस्‍मतवाला समझ‍िए कि हम आपके खिलाफ कोई टिप्‍पणी नहीं कर रहे हैं। पहले गुजरात सरकार ने बिलकिस बानो को मुआवजे के रूप में 5 लाख रुपये देने का प्रस्‍ताव दिया था, जिसे उन्‍होंने ठुकरा दिया।

गौरतलब है क‍ि गुजरात में अहमदाबाद के निकट रणधीकपुर गांव में एक भीड़ ने तीन मार्च 2002 को बिलकिस बानों के परिवार पर हिंदुत्व दंगाइयों ने हमला किया था। इस दौरान पांच महीने की गर्भवती बिलकिस बानो के साथ 17 लोगों ने सामूहिक बलात्कार किया गया जबकि उसके परिवार के 7 लोगों की हत्या कर दी गई थी।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 29 मार्च को बिलकिस बानो मामले में गलत जांच करने वाले 6 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने को कहा था। अपने फैसले में कोर्ट ने ये कहा था कि उन्हें सेवा में नहीं रखा जा सकता। 21 जनवरी, 2008 को मुंबई की कोर्ट ने 12 लोगों को मर्डर और गैंगरेप का आरोपी माना था। इसके बाद ट्रायल कोर्ट की ओर से सभी को उम्रकैद की सजा दी गई थी।

सभी आरोपियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में फैसले के खिलाफ अपील की थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 4 मई 2019 के फैसले में सामूहिक बलात्कार के इस मामले में 12 दोषियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी थी।

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