केंद्र सरकार ने पैन और आधार को जोड़ने की अंतिम समय सीमा 31 मार्च 2020 निर्धारित की। इसी बीच गुजरात हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि पैन कार्ड के आधार से लिंक नहीं होने पर यह रद्द नहीं होगा।

उच्च न्यायालय ने कहा है कि आधार अधिनियम की वैधता फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। जब तक सर्वोच्च न्यायालय इस पर अंतिम फैसला नहीं ले लेता है, तब तक आयकर विभाग इसको लिंक कराने का आदेश नहीं दे सकता है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में आगे कहा है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा पैन-आधार लिंक की डेडलाइन को बार-बार बढ़ाकर डेट जारी करना भी अवैध है।

जस्टिस हर्षा देवानी और जस्टिस संगीता के. विसेन की बेंच ने कहा कि हम यहां एक बात स्‍पष्‍ट कर देना चाहते हैं, इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 139AA तब तक वैध नहीं है, जब तक रोजर मैथ्यू बनाम साउथ इंडियन बैंक लिमिटेड मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय नहीं आ जाता है।

गुजरात हाईकोर्ट ने बंदिश सौरभ सोपारकर की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पैन कार्ड को रद्द घोषित नहीं किया जाएगा और उसे किसी भी कार्यवाही में केवल इस कारण से डिफॉल्ट नहीं माना जाएगा, क्योंकि उसका पैन आधार से जुड़ा नहीं है। अगर आवेदक आधार कार्ड की जानकारी आयकर विभाग को देता है तो फिर उसकी पूरी निजी गोपनीय जानकरी खो सकती है। जब तक कि रोजर मैथ्यू बनाम साउथ इंडियन बैंक मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं आता, तब तक ऐसा ही रहेगा।

बता दें कि आयकर विभाग ने 31 मार्च 2020 नई डेडलाइन तय कर दी थी। इससे पहले विभाग कई बार डेडलाइन को आगे बढ़ा चुका था। हालांकि, हाईकोर्ट ने अब पैन-आधार लिंक को लेकर सभी भ्रम दूर कर दिए हैं।

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