Sunday, October 24, 2021

 

 

 

GST में मिली राहत पर रविश का तंज कहा,चुनाव आयोग की आचार संहिता का पड़ गया अचार, ढह रही संवैधानिक संस्थाए

- Advertisement -
- Advertisement -

रवीश कुमार, वरिष्ट पत्रकार

नई दिल्ली | गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनावो से पहले मोदी सरकार ने लोगो को बड़ी राहत दी है. शुक्रवार को हुई जीएसटी कौंसिल की बैठक में करीब 215 वस्तुओ पर जीएसटी कम कर दिया गया है. अब इन वस्तुओ पर 28 फीसदी की जगह 5 , 12 और 18 फीसदी टैक्स लगेगा. इसके अलावा 18 फीसदी टैक्स स्लैब में आने वाली कुछ वस्तुओ के टैक्स में भी कमी की गयी है. अब सरकार के इस फैसले पर सवाल भी उठने शुरू हो गए है.

एनडीटीवी के पत्रकार और मशहूर एंकर रविश कुमार ने सवाल उठाया की आखिर आचार संहिता के दौरान इस तरह के फैसले कैसे लिए जा सकते है? उन्होंने कहा की एक समय पेट्रोल के दाम भी कम नही किये जा सकते थे, तो क्या चुनाव आयोग की आचार संहिता का आचार पड़ गया? रविश ने चेताते हुए कहा की हम संवैधानिक संस्थाओ को ढहते हुए देख रहे है , एक दिन इसकी कीमत हम ही चुकायेंगे.

शनिवार को रविश कुमार ने अपने फेसबुक पेज पर ‘व्यापारियों के लिए सबक- वोटर बने रहें कोई नहीं लूटेगा’ शीर्षक से एक पोस्ट लिखी. उन्होंने लिखा की जिन लोगों ने जीएसटी की तकलीफ़ों को लेकर आवाज़ मुखर की वो सही साबित हुए. व्यापारियों ने डर डर कर अपनी बात कही. उनके डर को हम जैसे कुछ लोगों ने आसान कर दिया. उसके बारे में लिखा और बोला कि जीएसटी बिजनेस को बर्बाद कर रही है। लोगों से काम छिन रहे हैं.

रविश कुमार ने जीएसटी में हो रही परेशानी को मीडिया द्वारा नही उठाये जाने पर भी सवाल उठाये. उन्होंने लिखा,’ इन छह महीनो में व्यापारियों को कितना नुक्सान हुआ होगा? वो यह भी जानते थे की गोदी मीडिया उनकी आवाज नही उठाएगा. पार्टी समर्थक या भक्त बनने पर रविश ने लिखा,’ सबक यही है कि आप ज़रूर एक पार्टी को पसंद करें, बार-बार वोट करें या किसी को एक बार भी करें तो भी आप मतदाता की हैसियत को बचाए रखिए.

रविश के अनुसार केवल गुजरात चुनाव की वजह से जीएसटी में ये राहत दी गयी . उन्होंने लिखा की गुजरात चुनाव का भय नहीं होता तो उनकी मांगें कभी नहीं मानी जाती. जब तक वे मतदाता हैं, नागरिक हैं तभी तक उनके पास बोलने की शक्ति है. जैसे ही वे भक्त और समर्थक में बदलते हैं, शक्तिविहीन हो जाते हैं.तब असंतोष ज़ाहिर करने पर बाग़ी करार दिए जाएंगे. लोकतंत्र में असंतोष ज़ाहिर करने का अधिकार हर किसी के पास होना चाहिए. अगर व्यापारी वर्ग पहले से ही वोटर की तरह व्यवहार करते तो आपके बिजनेस को लाखों का घाटा न होता.

पढ़े पूरी पोस्ट 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles