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हनुमान को दलित बताकर चौतरफा आलोचना झेल रहे यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अब राज्यपाल रामनाईक ने नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई के जीवन से बातों को रखने का तरीका सीखें।

उन्होने कहा कि अटल जी अपनी बातों को इतनी विनम्रता से रखते थे कि, संसद में हमेशा सभी का दिल जीत लेते थे। अटल जी की इन्ही बातों से सीख लेते हुए ऐसी बातें बोलनी चाहिए या ऐसे विचार रखने चाहिए, जो दूसरों के लिए अनुकरणीय हो।

यागराज में विज्ञान भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में गुरुवार को रामनाईक ने कहा कि, अपनी बातों को सभ्यता से रखना और किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाए बिना अपने विचारों को लोगों के सामने रखना लोकतंत्र के लिए बेहद जरुरी है। राम नाइक ने इस मुद्दे को राजनीतिक बताते हुए ज्यादा कुछ बोलने से मना कर दिया, लेकिन कुछ शब्दों में ही सीएम योगी को नसीहत दे डाली।

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बता दें कि इससे पहले शारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि हनुमान जी को दलित कहना अपराध है। मुख्यमंत्री का यह बयान बेहद दुखद है।

उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में दलित शब्द है ही नहीं। यह शब्द मानवों का गढ़ा हुआ है, जिसका अर्थ होता है पीड़ित या सताया हुआ। हनुमान भगवान शंकर के अवतार हैं। हनुमान कब और कहां पीड़ित, शोषित दिखते हैं? जिसके नेतृत्व में वानरी सेना ने रावण की सेना को पराजित किया हो, वह दलित कैसे हो सकता है? उनके पास कोई काम है नहीं, ऐसे में लोगों को भ्रमित करने के लिए इसी तरह का अनाप-शनाप बयान देते रहते हैंं।

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गौरतलब है कि अलवर जिले के मालाखेड़ा में एक सभा को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने बजरंगबली को दलित, वनवासी, गिरवासी और वंचित करार दिया था। योगी ने कहा कि बजरंगबली एक ऐसे लोक देवता हैं जो स्वयं वनवासी हैं, गिर वासी हैं, दलित हैं और वंचित हैं।

वहीं सर्व ब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश मिश्रा ने अपने वकील के जरिए भेजे नोटिस में योगी से इस मामले में माफी मांगने को कहा है। 3 दिन में ऐसा नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई की धमकी दी भी है।

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