Saturday, July 24, 2021

 

 

 

शाह फैसल के इस्तीफे पर बोले राज्यपाल – ‘अधिकारी के रूप में बेहतर सेवा करते’

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नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर के 2010 बैच के आईएएस अधिकारी रहे शाह फैसल के इस्तीफे पर जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक का बयान आया है। उन्होने कहा है कि मैं उनके अच्छे की कामना करता हूं। ‘‘फैसल एक कुशल एवं समर्पित अधिकारी रहे हैं जिन्होंने राज्य और उसकी जनता, खास तौर पर समाज के कमजोर तबकों के लोगों के कल्याण के लिए बहुत ही उत्साह से अपनी सेवाएं दी। ’’

उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा, ‘‘यदि वह आईएएस अधिकारी के तौर पर अपनी सेवा जारी रखते तो वह बेहतर तरीके से समाज के लोगों की सेवा करते। ’’ मलिक ने कहा, ‘‘जहां तक कश्मीरियों के प्रति उनकी भावना का सवाल है तो उन्हें इस क्षेत्र में तैनात किया जा सकता था ताकि वह गरीबी उन्मूलन और घाटी के युवाओं के लिए अवसर पैदा करने में पूर्ण सहयोग कर पाते।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें (फैसल को) युवाओं की आकांक्षाएं जानने के लिए तथा उनकी समस्याओं और शिकायतों के निवारण के लिए नया मंच तैयार करने की कोशिश के वास्ते उनसे संवाद करना चाहिए। ’’

हालांकि, राज्यपाल ने कहा कि यह उनके लिए जरुरी नहीं है कि वह फैसल को इस बात का सुझाव दे कि उन्हें क्या करना चाहिए लेकिन उनकी शुभकामनाएं सदैव उनके साथ है। मलिक ने कहा कि यदि वह युवाओं की समस्याओं के हल के लिए उनसे मिलने आते हैं तो वह उनसे मिलना पसंद करेंगे।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में निदेशक स्कूली शिक्षा रहे आईएएस शाह फैसल ने बुधवार को यह कहते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया कि कश्मीर में हो रही मौतों के विरोध में भारत सरकार की ईमानदार कोशिशों में कमी नजर आती है। उन्होंने आरोप लगाया था कि करीब 20 करोड़ भारतीय मुस्लिम हिंदूवादी ताकतों के हाथों गायब हो गए, हाशिए पर पहुंच गए और सेकंड क्लास नागरिक बनकर रह गए।

शाह फैसल 2010 के आईएएस परीक्षा के टॉपर हैं। हालांकि उनके इस्तीफे के बाद ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि वो अब राजनीति में कदम रख सकते हैं। इस बात की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पूर्व आईएएस शाह फैसल ने बताया कि अब तक, मेरा किसी भी मौजूदा मुख्यधारा की पार्टी में शामिल होने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा, “मैं गहराई से इमरान खान और अरविंद केजरीवाल से प्रेरित हूं, लेकिन हम एक संघर्ष क्षेत्र में काम कर रहे हैं और हमारे लिए उस स्थान पर काम करना बहुत आसान नहीं है। वह स्थान जिसने पिछले कुछ वर्षों में अपना औचित्य खो दिया है।”

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