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श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने राज्य में विधानसभा को भंग करने को लेकर हो रही आलोचनाओं पर बड़ा खुलासा करते हुए कहा था कि उन पर केंद्र की और से सज्जाद लोन की सरकार बनाने का दबाव था। हालांकि उन्हे अब अपने तबादले का डर सता रहा है।

कांग्रेस नेता गिरधारी लाल डोगरा की पुण्यतिथि के मौके पर एक कार्यक्रम में मलिक ने कहा- मैं जब तक यहां हूं, तभी तक हूं। ये मेरे हाथ में नहीं है। मेरा तबादला किए जाने की आशंका है। मुझे नहीं पता कि मेरा तबादला कब कर दिया जाएगा। मेरी नौकरी नहीं जाएगी। मैं जब तक यहां हूं, आपको भरोसा दिलाता हूं कि जब भी आप मुझे बुलाएंगे तो मैं आऊंगा।

इससे पहले मंगलवार को उन्होने कहा था कि सत्यपाल मलिक ने कहा कि केंद्र उन पर दो सदस्यों वाली सज्जाद लोन की पार्टी ‘पिपुल्स कॉन्फ्रेंस’ की सरकार बनाने का दबाव डाल रहा था। जिसके बाद उन्होंने विधानसभा भंग कर दी। मलिक ने कहा कि उन्हें लोग इसके लिए भले गालियां दें, लेकिन वह जानते हैं कि उन्होंने सही कदम उठाया।

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राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने 21 नवंबर को विधानसभा भंग कर दी थी। विधानसभा भंग होने से पहले करीब आधे घंटे के भीतर दो दलों ने राज्य में सरकार बनाने का दावा कर दिया था। पहले पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की मुखिया महबूबा मुफ्ती ने राज्यपाल को भेजी चिट्ठी में कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के समर्थन की बात कही थी।

इसके अलावा 15 मिनट बाद ही पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के लीडर सज्जाद लोन ने भी राज्यपाल के मुख्य सचिव को वॉट्सऐप पर चिट्ठी भेजने की बात कही। सज्जाद ने कहा कि भाजपा के सभी विधायकों के अलावा 18 से ज्यादा अन्य विधायकों का समर्थन हमारे साथ है। ये संख्या बहुमत से ज्यादा है।

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