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तिरुवंतपुरम । सोमवार को केरल के राज्यपाल पी सदाशिवम् का विधानसभा में दिया गया अभिभाषण विवादों के घेरे में आ गया है। राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में मोदी सरकार और आरएसएस की आलोचना वाली लाइन को नही पढ़ा। जिसके बाद सत्ता पक्ष और कांग्रेस ने राज्यपाल पर केंद्र सरकार को ख़ुश करने का आरोप लगाया। जबकि भाजपा ने राज्यपाल का बचाव किया।

सोमवार को राज्यपाल, केरल विधानसभा के संयुक्त सत्र को सम्बोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने केरल सरकार की उपलब्धियो को गिनाते कहा,’देश में बेहतरीन कानून व व्यवस्था वाले इस राज्य के खिलाफ कुछ संप्रादायिक ताकतों ने फर्जी आधार पर पूरे भारत में एक माह तक अभियान चलाया। संयुक्त राष्ट्र ने केरल को देश का एकमात्र ऐसा राज्य घोषित किया है, जहां मानव विकास सूचकांक सबसे ज्यादा है।’

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सदाशिवम ने आगे कहा, ‘हमारे सामाजिक क्षेत्र की उपलब्धियों पर सवाल उठाए गए, कानून व व्यवस्था की स्थिति का तिरस्कार किया गया। इसके बावजूद केरल के लोग हमारी परंपराओं और उपलब्ध्यिों की रक्षा के लिए एक साथ खड़े हुए। कुछ सांप्रदायिक ताकतों की ओर से कोशिश के बावजूद राज्य में सांप्रदायिक दंगे नहीं हुए।’ राज्यपाल के क़रीब 89 मिनट के भाषण के बाद इसकी प्रतियाँ बाँटी गयी।

जब ये प्रतियाँ विधायकों के पास पहुँची तो वह यह देखकर हैरान रह गए की राज्यपाल ने उन तीन लाइन को नही पढ़ा जिनमे मोदी सरकार और आरएसएस की आलोचना की गयी थी। इस पर वह सत्ता पक्ष एवं कांग्रेस के निशाने पर आ गए। वही भाजपा ने उनका यह कहकर बचाव किया की उन्होंने अपनी विवकाधीन शक्तियों का इस्तेमाल किया है। मालूम हो कि पी सदाशिवम् , सप्रीम कोर्ट के जज भी रह चुके है।

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