डिजिटल लेनदेन से सरकार और बैंक वसूलेंगे 26 हजार करोड़

1:45 pm Published by:-Hindi News

नई दिल्ली | नोट बंदी के बाद से देश में डिजिटल लेनदेन काफी बढ़ा है. कैश की किल्लत की वजह से मज़बूरी में लोगो को यह माध्यम अपनाना पड़ा. यही वजह है की देश में डिजिटल लेनदेन करने वालों के आंकड़े में अप्रत्याशित तौर पर वृद्धि दर्ज की गयी. अगर ऐसा ही चलता रहा तो अनुमान है की इस साल डिजिटल लेनदेन करीब 30 फीसदी तक पहुँच सकता है. जबकि पिछली बार यह केवल 10 फीसदी था.

अगर यह आंकड़ा सही रहा तो इससे सरकार और बैंक को करीब 26 हजार करोड़ रूपए की कमाई होगी. मालूम हो की प्रत्येक डिजिटल ट्रांसेक्सन पर बैंक कुछ न कुछ शुल्क वसूलता है. इसके अलावा एटीएम से चार से ज्यादा ट्रांसेक्सन करने पर भी बैंक शुल्क वसूलता है. अभी कुछ दिन पहले ही कुछ प्राइवेट बैंकों ने खातो से नकदी लेनदेन पर भी शुल्क लगाने का फैसला किया है. 1 मार्च से हर चार ट्रांसेक्सन के बाद 150 रूपए शुल्क लगेगा.

कह सकते है की नोट बंदी का फायदा देश की जनता को हो या ना हो लेकिन बैंक और सरकार को काफी हुआ है. आंकड़ो के मुताबिक नोट बंदी से पहले देश में 90 फीसदी ट्रांसेक्सन नकदी में और बाकी डिजिटल में होता था. फिक्की-पीडब्ल्यूसी के मुताबिक 2015 में देश का ग्राहक खर्च करीब 120 करोड़ रूपए था जो 2016 में 12 फीसदी की ग्रोथ के साथ बढ़कर 135 लाख करोड़ हो गया.

इसमें से करीब 10 फीसदी डिजिटल ट्रांसेक्सन था , इसका मतलब करीब 13.5 लाख करोड़ रूपए का लेनदेन प्लास्टिक मनी के तौर पर हुआ. इस पर करीब 0.5 फीसदी शुल्क सरकार और बैंक वसूलती है. इसका मतलब पिछले साल सरकार ने करीब 6 हजार 750 करोड़ रूपए शुल्क के तौर पर वसूले. इस साल डिजिटल लेनदेन बढ़कर 51 लाख करोड़ रूपए हो जायेगा. इसका मतलब सरकार और बैंक करीब 26 हजार करोड़ रूपए ग्राहकों से वसूलेंगे.

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