सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को मौत की सज़ा के मामले में फांसी के अलावा किसी अन्य विकल्प पर विचार करने को कहा है.

कोर्ट ने इस मामले में एटॉर्नी जनरल केके वेनुगोपाल से सहायता मांगी है. इसके साथ ही केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है. जिसका जवाब केंद्र को तीन हफ़्तों में देना है.

न्यूज एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी. वाय. चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने सरकार को प्रतिक्रिया देने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है.

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्र की बेंच ने कहा, एक व्यक्ति को शांति से मरना चाहिए न की दर्द से. सदियों से कहा गया है कि दर्दभरी मौत के बराबर कुछ भी नहीं है.

दरअसल, याचिका में कहा गया कि संविधान में सम्मान के साथ जीने के अधिकार में बिना दर्द और तकलीफ के सम्मान के साथ मरने का अधिकार भी शामिल है.

साथ ही याचिका में कोर्ट को मौत की सज़ा के लिए इंजेक्शन देने, गोली मारने या इलेक्ट्रिक चेयर का इस्तेमाल करने जैसे तरीके अपनाने का सुझाव दिए गए है.

कोर्ट ने अब  कहा कि सरकार को आधुनिक विज्ञान को ध्यान में रखते हुए मौत की सजा का प्रारूप तैयार करना चाहिए. क्योंकि हमारा संविधान संवेदनाओं का सम्मान करता है.

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