बरेली | योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही अवैध बूचड़खाने और पशु तस्करों पर कार्यवाही शुरू हो गयी. मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियो को निर्देश दिया है की प्रदेश में गाय तस्करी रोकने के लिए अतिरिक्त गश्त बधाई जाए और अवैध बूचड़खानों पर कार्यवाही की जाए. लेकिन उनके ही प्रदेश में स्थित एक सरकारी संस्थान में गायो को कसाइयो को बेचने की घटना सामने आई है.

बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा शोध संस्थान (IVRI) के एक सीनियर वैज्ञानिक ने आरोप लगाया है की यहाँ बीमार और अनुत्पादित गायो की नीलामी कसाइयो को की जा रही है. इस बारे में ट्वीट करते हुए उन्होंने इसकी शिकायत प्रधानमंत्री मोदी, पीएमओ और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को की है. हालाँकि संसथान के डायरेक्टर इन सभी आरोपों को ख़ारिज कर दिया है.

IVRI के महामारी विज्ञान विभाग के हेड भोजराज सिंह ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा है ,’ 2011 से लेकर 2014 तक करीब 259 गाय नीलाम की गयी. जिनमे से 186 गायो को अल्पसंख्यक समुदाय ने खरीदा. इसके अलावा 74 भारतीय थारपारकर नस्ल की गायो की नीलामी की गयी जिनमे से 59 गाय मुस्लिमो ने खरीदी. इनमे से 44 मुस्लिम बूचड़खाने से जुड़े है जबकि 7 पशुओ की खरीद-फरोख्त से जुड़े हुए है. बाकी डेरी उधोग से जुड़े हुए है.’

भोजराज आगे लिखते है की आखिर पशु चिकित्सा का सबसे बड़ा संसथान बीमार जानवरों को क्यों बेच देता है? क्या इनका इलाज नहीं किया जा सकता? अगर बीमार जानवरों का इलाज IVRI में नहो हो सकता तो फिर कहाँ होगा? भोजराज ने बताया की सभी जानकारी आरटीआई के जरिये जुटाई गयी है. उधर संस्थान के निदेशक आरके सिंह ने सभी आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा की नीलामी की प्रक्रिया केंद्र सरकार के दिशा निर्देशों के आधार पर की जाती है. और जानवर उन्ही को बेचा जाता है जो सबसे अधिक बोली लगाता है. इसका किसी की जाति धर्म से कोई लेना देना नही है.

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