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नई दिल्ली | नोट बंदी के बाद देश की 86 फीसदी करेंसी चलन से बाहर हो गयी. जिसकी वैल्यू 15 लाख करोड़ रूपए के करीब थी. सरकार को उम्मीद थी की बैंकिंग सिस्टम में करीब 10 लाख करोड़ रूपए वापिस आ जायेगा. अब चूँकि सरकार को 15 लाख करोड़ रूपए छापने का अधिकार है इसलिए सरकार के खजाने में 5 लाख करोड़ रूपए अतिरिक्त आ जाते. लेकिन जरुरी नही की जो हम सोचते है , सब कुछ वैसा ही हो.

आरबीआई के आंकड़ो के मुताबिक , अभी तक बैंकों में 13 लाख करोड़ रूपए जमा हो चुके है. जबकि पुराना पैसा जमा करने में अभी भी 15 दिन बचे हुए है. अब सरकार को अंदेशा है की कही बैंकों में जमा रकम , पुराने नोटों की वैल्यू से ज्यादा न पहुँच जाए. कही बैंकों में 15 लाख करोड़ रूपए से ज्यादा करेंसी न पहुँच जाए. अगर ऐसा होता है तो अर्थव्यवस्था के लिए यह काफी नुक्सानदेह हो सकता है.

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यही नही इससे सरकार की भी किरकिरी होना तय है. विपक्ष अभी भी सरकार के नोट बंदी के फैसले का विरोध कर रहा है. विपक्ष के अनुसार नोट बंदी की वजह से देश 20 साल पीछे चला गया है. ऐसे में सरकार बिलकुल नही चाहेगी की विपक्ष के हाथ कोई मुद्दा लगे. इसलिए सरकार ने आरबीआई और सभी बैंकों को , जमा हुए पुराने नोटों की दोबारा गिनती करने के लिए कहा है.

आर्थिक मामलों के सचिव शशिकांत दास ने कल हुई प्रेस वार्ता में कहा की हमें अंदेशा है की नोटों की डबल काउंटिंग हुई है. इसलिए हमने आरबीआई को दोबारा काउंटिंग करने के निर्देश दिए है. शशिकांत ने बताया की नोट बंदी के बाद से 5 लाख करोड़ रूपए की करेंसी वापिस बैंकिंग सिस्टम में डाली जा चुकी है. इसके अलावा 500 के नए नोटों की छपाई भी तेज कर दी. हालात दो से तीन हफ्ते में सुधरने की पूरी उम्मीद है.

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