असम की की बीजेपी सरकार ने राज्य में सभी सरकारी मदरसों और संस्कृत स्कूलों को बंद करने के प्रस्ताव को रविवार को मंजूरी दे दी। रविवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में ये फैसला लिया गया है। इस सिलसिले में राज्य विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र में एक विधेयक पेश किया जाएगा।

असम सरकार के प्रवक्ता पटवारी ने कहा, ‘मदरसा और संस्कृत स्कूलों से जुड़े वर्तमान कानूनों को निरस्त कर दिया जाएगा। विधानसभा के अगले सत्र में एक विधेयक पेश किया जाएगा।’ असम विधानसभा का शीतकालीन सत्र 28 दिसंबर से शुरू होगा।

शिक्षा मंत्री हेमंत बिस्वा सर्मा ने सोमवार को पत्रकारों को बताया, “साल 1934 में जब असम को सर सैयद सदाउल्ला के तहत मुस्लिम लीग सरकार चला रही थी, तब मदरसा शिक्षा को असम के एजुकेशन करिकुलम में लाया गया था। रविवार को हमारी सरकार ने कैबिनेट मीटिंग में फैसला लिया कि हम इस व्यवस्था में सुधार करते हुए इसे धर्मनिरपेक्ष बनाएंगे। नतीजतन सभी (सरकारी) मदरसे बंद हो जाएंगे और उन्हें सामान्य शिक्षा यानी रेग्युलर स्कूलों में बदल दिया जाएगा।”

शिक्षा मंत्री के मुताबिक, “हम इंडियन सिविलाइजेशन (Indian Civilisation) पर कोर्स चालू करने वाले हैं। यह इतिहास से अलग होगा। इसके लिए करिकुलम सभ्यतागत दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाएगा।”

सरमा के मुताबिक संस्कृत स्कूलों को कुमार भास्कर वर्मा संस्कृत और प्राचीन अध्ययन विश्वविद्यालय को सौंप दिया जाएगा। उन्होंने कहा था कि संस्कृत स्कूलों के ढांचे का इस्तेमाल उन्हें भारतीय संस्कृति, सभ्यता और राष्ट्रवाद के शिक्षण एवं शोधन केंद्रों की तरह किया जाएगा।

भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधानसभा के उपाध्यक्ष अमीनुल हक लश्कर ने कहा था कि निजी मदरसों को बंद नहीं किया जाएगा। लश्कर ने नवंबर में कछार जिले में एक मदरसे की आधारशिला रखते हुए कहा था, ‘इन (निजी) मदरसों को बंद नहीं किया जाएगा क्योंकि इन्होंने मुस्लिमों को जिंदा रखा है।’

पटवारी ने कहा कि राज्य कैबिनेट ने एक अलग प्रस्ताव को मंजूरी दी है ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि निजी शिक्षण संस्थानों के अधिकारी उन्हें संचालित करने से पहले सरकार से अनुमति हासिल करें। मंत्री ने कहा, ‘निजी पक्ष बिना अनुमति के कई शैक्षणिक संस्थानों का गठन कर रहे हैं। कई महीनों तक इनका संचालन करने के बाद वे सरकार से अनुमति मांगते हैं. इसे अब अनुमति नहीं दी जाएगी।’