Thursday, October 21, 2021

 

 

 

सरकार ने प्राइवेट ट्रेनों के लिए मांगे आवेदन, अपना किराया तय करने की भी होगी अनुमति

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नई दिल्ली: भारतीय रेलवे की पटरियों पर जल्द ही प्राइवेट ट्रेन सरपट दोड़ती हुई नजर आएगी। हालांकि इन ट्रेनों से यात्रा करना महंगा साबित होगा। दरअसल, सरकार उनको आपरेट करने वाली कंपनियों को किराया तय करने की छूट देने जा रही है।

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वीके यादव ने कहा, “निजी कंपनियों को अपने तरीके से किराया तय करने की आजादी दी गई है. हालांकि उन रूट पर अगर एसी बसें और प्लेन की भी सुविधा है तो किराया तय करने के पहले कंपनियों को इस बात का ध्यान रखना होगा।”

ता दें कि भारत ने इस परियोजना में रुचि रखने वाली कंपनियों को जुलाई में 151 ट्रेनों के माध्यम से 109 ओरिजिन डेस्टिनेशनल पर यात्री ट्रेनें चलाने के लिए अपनी इच्छा जाहिर करने को था। नई दिल्ली और मुंबई सहित रेलवे स्टेशनों को आधुनिक बनाने के लिए भी निवेशकों की रुचि मांगी है।

वीके यादव ने बताया कि एल्सटॉम, बॉम्बार्डियर इंक, जीएमआर इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने इन परियोजनाओं में इच्छा दिखाई है। भारत के रेल मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, ये परियोजनाएं अगले 5 साल में 7.5 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश ला सकती हैं।

एक अधिकारी ने बताया कि अधिकतम किराए की सीमा तय नहीं होने के कारण और लागत को देखते हुए किराया मौजूदा ट्रेन सेवाओं की तुलना में ज्यादा होने की उम्मीद है। निजी ऑपरेटर्स अपनी वेबसाइट के द्वारा भी टिकट बेच सकेंगे लेकिन उनकी वेबसाइट को पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम से जुड़ा होना जरुरी होगा। भारतीय रेलवे जल्द ही विमानों के किराए की तर्ज पर बिजी स्टेशनों पर यात्रियों से किराए में ‘यूजर चार्ज’ वसूलना शुरू करेगा।

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के क्रम में राजस्व जुटाने के लिए यह निर्णय किया गया है। इसके प्रभाव में आने के बाद यह पहली बार होगा जब रेल यात्रियों से इस तरह का शुल्क वसूला जाएगा। शुल्क मामूली होगा और यह देश के सात हजार रेलवे स्टेशनों में से लगभग 10-15 प्रतिशत स्टेशनों पर ही लागू होगा।

अध्यक्ष ने कहा, “हम बहुत मामूली यूजर चार्ज वसूल करेंगे. हम सभी स्टेशनों जो दोबारा बन रहे हैं, या नहीं, दोनों के लिए यूजर चार्ज संबंधी अधिसूचना जारी करेंगे। यूजर चार्ज सभी सात हजार स्टेशनों पर नहीं, बल्कि केवल उन्हीं स्टेशनों पर वसूल किया जाएगा जहां अगले पांच साल में यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी होगी. यह लगभग 10-15 प्रतिशत स्टेशनों पर ही लागू होगा।”

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