nirbhaya
चित्र- सांकेतिक

देहरादून । 16 दिसम्बर की वो काली रात शायद ही कोई हिंदुस्तानी भूल सकता है जिसमें हैवानियत की सारी हदें पार हो गयी। एक लड़की को कुछ लोगों ने बड़ी ही बेदर्दी से अपनी हवस का शिकार बनाया। उस समय पूरे देश के अंदर उबाल आ गया, बड़ी संख्या में लड़के और लड़कियाँ सड़क पर उतर गए। आरोपियों को जल्द से जल्द फाँसी देने की माँग की गयी। हम उस केस को निर्भया केस के नाम से जानते है।

इस केस को इतने साल गुज़र गए लेकिन एक प्रश्न आज भी हम लोगों के सामने मुँह बायें खड़ा है। वो प्रश्न है कि क्या निर्भया केस के बाद हमारा समाज इतना जागरूक हुआ की ऐसे मामलों की फिर पुनरावर्ति नही होगी? क्या ऐसे हैवान जो अभी भी सामज में खुले घूम रहे है, उनके अंदर क़ानून का कोई डर व्याप्त हुआ? इसका जवाब शायद अभी भी नही ही है। क्योंकि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में जो कुछ हुआ वह इन सवालों का जवाब ख़ुद दे रहा है।

2 दिसम्बर को देहरादून में एक और निर्भया केस की पुनरावर्ति होते होते बच गयी। लड़की की सूझबूझ ने उसे बचा लिया। दरअसल देहरादून की एक लड़की ने अपने ट्वीटर अकाउंट पर कुछ ट्वीट कर बताया की 2 दिसम्बर को उसके साथ एक बहुत बड़ा हादसा होने से बच गया। यह घटना देहरादून के बल्लूपुर चौक की है। जबकि लड़की प्रेमनगर की रहने वाली है। पूरी घटना बताते हुए लड़की ने लिखा,’ रात के 7 भी नहीं बजे थे। मैं सिटी बस के लिए सड़क के किनारे खड़ी इंतजार कर रही थी जो मैं लगभग रोज़ लेती हूं। ‘

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लड़की ने आगे बताया,’ तभी एक शेयर ऑटो आकर मेरे सामने रुकता है, मैं अंदर झांककर देखती हूं तो अंदर दो-तीन लड़के बैठे दिखाई देते हैं, मैं ऑटो को मना कर देती हूं। उसी दौरान मेरी बस भी आ जाती है और मैं काफी राहत महसूस करती हूं। बस के अंदर लगभग 10-12 आदमी और ड्राइवर-कंडक्टर मौजूद थे। मैंने सीट ली और कंडक्टर को पैसे देकर अपने स्टॉप की जानकारी दी। जैसे ही मैंने अपना स्टॉप पास आता देखा, मैंने अपना बैग उठाया लेकिन बस रुक ही नहीं रही थी। इससे पहले कि मैं कुछ कहती, मेरा स्टॉप पीछे छूट गया।

मैंने तुरंत कंडक्टर से सवाल पूछा लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। मैं ड्राइवर पर चिल्लाई लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अपने फोन पर मैंने स्पीड डायल का पहला नंबर डायल किया और उनको डराते हुए कहा कि मैं अपने पापा को फोन कर रही हूं लेकिन फिर भी उनपर कोई असर नहीं हुआ। अब मैंने पुलिस को कॉल करने का फैसला लिया और ड्राइवर-कंडक्टर को बोला कि पुलिस को कॉल कर रही हूं, लेकिन कॉल लगी नहीं।

कंडक्टर मेरे फोन तक पहुंच गया लेकिन मैंने ऐसा दिखाया जैसे कॉल लग गई है और मैं पुलिस को लोकेशन बता रही हूं। जब कंडक्टर ने मुझे पुलिस से बात करते सुना तो ड्राइवर को बस रोकने के लिये चिल्लाया। बस रुकी और मैं भागकर नीचे उतरी। अंधेरा हो चुका था। जबतक मैं बस का नंबर देखती तबतक बस लेकर वो भाग चुके थे। बस में और आदमी भी थे लेकिन कोई कुछ नहीं बोला था। मुझे नहीं पता कि वो जानने वाले थे या नहीं लेकिन कोई नहीं बोला।’

लड़की के इन ट्वीट पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने तुरंत संज्ञान लिया और लड़की को जवाब में लिखा,’ मैंने आपके ट्वीट पढ़े, ये ट्वीट मैंने दो बेटियों के पिता की हैसियत से पढ़े और पढ़कर इतना ही शर्मिंदा हुआ जितना आपके पिताजी हुए होंगे। सूबे का मुख्यमंत्री होने के नाते मैं आपको यह आश्वासन देता हूँ की आपको चिंता करने की कोई ज़रूरत नही है। मैंने आपकी मदद और आगे की कार्यवाही के लिए आपका ट्वीट एसएसपी को भेज दिया है। ‘

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