मुंबई | हाल के दिनों में भीड़ की बर्बरता के कई मामले सामने आये है. ज्यादातर मामलो में गौतस्करी या गौमांस की तस्करी का आरोप लगाकर कथित आरोपी को पीटा गया. लेकिन भीड़ का यह गुस्सा केवल गौरक्षा के लिए ही दिखाई देता है. तब यह भीड़ खामोश खडी रहकर तमाशा देख रही होती है जब कोई सनकी किसी लड़की के ऊपर सरेआम चाकू से हमला करता है. वो उस पर हमला करता रहता है और भीड़ तमाशबीन बन सब कुछ देखती रहती है.

इसकी एक बानगी हाल ही में दिल्ली में देखने को मिली. जहाँ एक तरफ़ा प्यार में पागल होकर एक युवक ने सरेबाजार लड़की पर चाकू से कई वार किये. अगर वहां खडी भीड़ चाहती तो हमलावर को ऐसा करने से रोक सकती थी. भीड़ के इस दोहरे रवैये के बारे में एक लड़की ने अपने फेसबुक पेज पर भी लिखा है. इस लड़की ने देश की चरमराती व्यवस्था और लोगो की खत्म हो चुकी इंसानियत के बारे में आँखे खोलने वाली एक घटना का जिक्र किया है.

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लड़की ने बताया की वो एक बार मुंबई की लोकल से सफ़र कर रही थी. यह एक महिला कम्पार्टमेंट था जिसमे मेरे अलावा करीब 7 और महिलाये बैठी हुई थी. इसी कम्पार्टमेंट में हैंडीकैप्ड एरिया के पास एक लड़का भी खड़ा था. महिला कम्पार्टमेंट में लड़के की मौजूदगी होने के बावजूद इस पर किसी ने सवाल खड़ा नही किया. थोड़ी देर बाद उस लड़के ने एक लड़की की तरफ इशारे करने और गलिया देनी शुरू कर दी.

इसके बाद वो मेरे पास आया तो मैंने अपना मुंह नीचे कर लिया. उसने मुझे भी गाली देनी शुरू की और अपनी पेंट खोलकर गन्दी हरकत करनी शुरू कर दी. तभी मैंने मदद के लिए आगे बैठी महिलाओ से महिला हेल्पलाइन से फोन करने की बात कही. लेकिन जब महिला हेल्पलाइन पर हमने अपनी आपबीती बतायी तो हम पर हँसने लगे और फ़ोन काट दिया. अगला स्टेशन कांदिवली पर वो लड़का उतर गया. लेकिन किसी ने भी उसको नही रोका. हम इतनी महिलाये थी की उसको आसानी से सबक सीखा सकती थी लेकिन ऐसा नही हुआ.