बीते पांच साल में न्यूनतम स्तर पर पहुंची GDP दर, चौथी तिमाही में भी रही गिरावट

12:08 pm Published by:-Hindi News

मोदी सरकार द्वारा दोबारा सत्ता संभालने के तुरंत बाद ही देश की नई वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को आर्थिक मोर्चे पर अच्छी खबर सुनने को नहीं मिली है। पांच साल में पहली बार विकास दर में कमी देखने को मिली है। यह पिछले वित्त वर्ष की तीन तिमाही के मुकाबले भी काफी कम है।

बीते वित्त वर्ष (2018-19) की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में जीडीपी ग्रोथ रेट 5.8% रही। एग्रीकल्चर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के खराब प्रदर्शन की वजह से विकास दर में गिरावट आई है। सांख्यिकी विभाग ने शुक्रवार को विकास दर के आंकड़े जारी किए हैं।

अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में विकास दर 6.6% थी। भारत की तिमाही जीडीपी ग्रोथ अब दुनिया में सबसे तेज नहीं रही क्योंकि जनवरी-मार्च तिमाही में चीन की ग्रोथ 6.4% रही थी। वहीं, वित्त वर्ष 2018-19 में देश की प्रति व्यक्ति आय में 10% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

तिमाही  जनवरी-मार्च 2019 अक्टूबर दिसंबर 2018 जनवरी मार्च 2018
जीडीपी ग्रोथ 5.8% 6.6% 8.1%
वित्त वर्ष 2018-19 2017-18 2013-14
जीडीपी ग्रोथ 6.8% 7.2% 6.4%

केंद्रीय सांख्यिकी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक ग्रॉस वैल्यू एडिशन (जीवीए) पिछले साल की मार्च तिमाही के 7.9% के मुकाबले 5.7% बढ़ा है। जीडीपी में से टैक्स घटाने पर जीवीए का आंकड़ा निकलता है।

सेक्टर जनवरी-मार्च 2019 में ग्रोथ जनवरी-मार्च 2018 में ग्रोथ
एग्रीकल्चर, फोरेस्ट्री, फिशिंग -0.1% 6.5%
मैन्युफैक्चरिंग 3.1% 9.5%
फाइनेंशियल, रिएल एस्टेट, प्रोफेशनल सर्विसेज 9.5% 5.5%

 

तिमाही ग्रोथ में कमी का असर पूरे वित्त वर्ष की विकास दर पर पड़ा है। यह 6.8% रही है जो 5 साल में सबसे कम है। इससे पहले 2013-14 में विकास दर 6.4% दर्ज की गई थी।

वहीं आर्थिक मामलों के सचिव एस सी गर्ग का कहना है कि नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल सेक्टर की दिक्कतों जैसी अस्थाई वजहों से चौथी तिमाही की विकास दर में कमी आई है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भी धीमापन रह सकता है। दूसरी तिमाही से इकोनॉमी में तेजी आएगी।

शुक्रवार को उन्होंने पत्रकारों को बताया, ‘‘वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में नरमी एनबीसीफसी क्षेत्र में दबाव के कारण खपत वित्त पोषण के प्रभावित होने जैसे अस्थायी कारकों का नतीजा है। चालू वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में भी आर्थिक वृद्धि दर अपेक्षाकृत धीमी रहेगी और दूसरी तिमाही से इसमें तेजी आएगी।’’

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