नई दिल्ली | बुधवार को नोट बंदी को लेकर आरबीआई के रिपोर्ट के बाद यह बहस पुरे देश में शुरू हो गयी है की नोट बंदी हिट थी या फ्लॉप? हालाँकि सरकार नोट बंदी को हिट करार दे रही है लेकिन जिन कारणों को गिनाकर प्रधानमंत्री मोदी ने नोट बंदी की घोषणा की थी वो आरबीआई के रिकार्ड्स से पुरे होते दिखाए नही देते. उधर विपक्ष भी लगातार मोदी सरकार पर देश को गुमराह करने का आरोप लगा रहे है.

इसी बीच केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने भी चालू वित्त वर्ष की जून में खत्म हुई तिमाही के जीडीपी के आंकड़े पेश कर दिए है. रिपोर्ट के अनुसार इस तिमाही में देश के सकल घेरलू उत्पाद (जीडीपी) में भारी गिरावट देखने को मिली है. यह सब नोट बंदी के असर के रूप में देखा जा रहा है. निश्चित तौर पर सीएसओ के ये आंकड़े मोदी सरकार के लिए बिलकुल भी शुभ समाचार नही है. अब विपक्ष मोदी सरकार पर और आक्रमक हो सकता है.

गुरुवार को सीएसओ ने अधिकारिक आंकड़े पेश करते हुए बताया की चालू वित्त वर्ष की जून में खत्म हुई तिमाही में देश की जीडीपी 6.1 से घटकर 5.7 फीसदी पर आ गयी है. जबकि इसके 6.6 फीसदी रहने के आसार व्यक्त किये गए था. अगर पिछले साल के इसी तिमाही के आंकड़ो की बात करे तो यह बड़ी गिरावट है. पिछले साल इसी तिमाही में जीडीपी 7.1 फीसदी थी. रिपोर्ट में कहा गया की देश की जीडीपी इस तिमाही में 31.10 लाख करोड़ रूपए रही.

इस तरह देश की अर्थव्यवस्था में आ रही गिरावट मोदी सरकार के माथे पर बल लाने के लिए काफी है. यह माना जा रहा है की नोट बंदी की वजह से देश की जीडीपी लगातार गिर रही है. कुछ ऐसे ही आरोप कांग्रेस भी मोदी सरकार पर लगा रही है. कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने नोट बंदी को बड़ा घोटाला करार देते हुए कहा की नोट बंदी की वजह से देश की जीडीपी को सवा दो लाख करोड़ रूपए का नुक्सान हुआ है. इसके लिए मोदी को पुरे देश से माफ़ी मांगनी चाहिए.

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