बीजेपी नेताओं के करीबियों द्वारा फर्जी कंपनियों के जरिए भ्रष्टाचार के एक के बाद एक मामले सामने आ रहे है. अब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का नाम भी भ्रष्टाचार के मामलों से जुड़ता जा रहा है.

दरअसल, गडकरी के निजी सचिव वैभव डांगे ने महाराष्ट्र के मोतीराम किशनराव के साथ मिलकर इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एऩर्जी (IFGE) की स्थापना की. IFGE के कंपनियों के रजिस्ट्रार के दस्तावेजों के अनुसार, ये कंपनी सरकार के विभागों और सरकारी स्वामित्व वाली संस्थाओं से फण्ड ले सकती है.

IFGE की बैलेंसशीट के मुताबिक 2015 में कंपनी के पास 74 लाख कैश इन हैण्ड थे और 73 लाख रुपये corpus fund में थे. अब 2016 में ये Corpus fund बढ़कर 1 करोड़ 33 लाख हो गया है. इस कंपनी से नितिन गड़करी, सुरेश प्रभु जैसे काबिल मंत्री जुड़े हैं.

डांगे साढे तीन साल से गडकरी के निजी सचिव के तरौ पर काम कर रहे हैं. डांगे एबीवीपी और आरएसएस से करीबी रिश्ता है. मामले की जांच के साथ ही  डांगे ने निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया. हालांकि अभी भी वह कंपनी के आधे हिस्से के मालिक हैं.

इस मामले में अब कांग्रेस ने बीजेपी से सवाल किया है कि संस्था में सुरेश प्रभु और नितिन गडकरी का नाम है तो क्या आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है. क्या यह स्वार्थों के विरोधाभास को नहीं दर्शाता. आचार संहिता क्या निजी सचिव पर लागू नहीं होती. क्या गडकरी धृतराष्ट्र की तरह मंत्रालय चला रहे हैं.

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री को निशाने पर लेते हुए कहा, डांगे आरएसएस से जुड़े हैं. वह एक कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के साथ भी बैठे हैं. तो क्या प्रधानमंत्री इस मामले में कुछ बोलेंगे या कुछ कार्रवाई करेंगे.

मुस्लिम परिवार शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें

Loading...

विदेशों में धूम मचा रहा यह एंड्राइड गेम क्या आपने इनस्टॉल किया ?