प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट बुलेट ट्रेन मुसीबतों मे आ गया है। दरअसल, जापान ने इस प्रोजेक्ट से अपने हाथ खींचते हुए पैसा देने से मना कर दिया है। बताया जा रहा है कि प्रोजेक्ट की फंडिंग करने वाली जापानी कंपनी जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी यानी जीका ने बुलेट ट्रेन नेटवर्क के लिए फंडिग रोक दी है।

ये फंडिंग किसानों द्वारा प्रोजेक्ट का विरोध करने के बाद रोकी गई है। कंपनी ने मोदी सरकार से कहा है कि इस प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ने से पहले उसे देश में किसानों की समस्या पर पहले गौर करने की जरूरत है। बता दें कि गुजरात में करीब एक हजार किसानों ने गुजरात उच्च न्यायालय में मंगलवार को हलफनामा दायर कर परियोजना का विरोध किया है। इसके अलावा महाराष्ट्र के किसान भी इस प्रोजेक्ट के विरोध में है।

किसानों ने हलफनामे में कहा कि वे नहीं चाहते कि परियोजना के लिए उनकी जमीन का अधिग्रहण किया जाए। किसानों ने यह भी कहा कि मौजूदा भू अधिग्रहण प्रक्रिया इस परियोजना के लिए भारत सरकार को सस्ती दर पर कर्ज मुहैया कराने वाली जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) के दिशानिर्देशों के भी विपरीत है।

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किसानों ने आरोप लगाया कि गुजरात सरकर ने बुलेट ट्रेन के लिये सितंबर 2015 में भारत और जापान के बीच समझौते के बाद भू अधिग्रहण अधिनियम 2013 के प्रावधानों को हलका किया और प्रदेश सरकार द्वारा किया गया संशोधन अपने आप में जेआईसीए के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है।

जानकारी के अनुसार, 508 किलोमीटर की बुलेट ट्रेन परियोजना में लगभग 110 किलोमीटर का सफर महाराष्ट्र के पलघर से गुजरता है और केन्द्र सरकार को यहां के किसानों से जमीन लेने में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। वहीं गुजरात में भी सरकार को लगभग 850 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण आठ जिलों में फैले 5000 किसान परिवारों से करना है।

जापानी एजेंसी ने फिलहाल 125 करोड़ रुपये जारी किए हैं। भारत और जापान के बीच हुए समझौते के मुताबिक इस प्रोजेक्ट को 2022 तक पूरा करने के लिए जापान को लगभग 80,000 करोड़ रुपये का निवेश करना है जबकि बचा हुआ 20,000 रुपये केन्द्र सरकार योजना में लगाएगी।

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