Thursday, October 28, 2021

 

 

 

तबलीगी मामले में मीडिया को लेकर बोले CJI – ‘अभिव्यक्ति की आजादी का हुआ सबसे अधिक दुरुपयोग’

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निज़ामुद्दीन मरकज मामले के बाद कोरोना के प्रसार को लेकर जमाती लोगों के खिलाफ की गई झूठी मीडिया रिपोर्टिंग को लेकर उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि हाल के समय में बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार का ‘सबसे ज्यादा’ दुरूपयोग हुआ है।

जनसत्ता के अनुसार, प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणिन की पीठ ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से जमीयत-उलेमा-ए-हिंद और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कहा, ‘बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार का हाल के समय में सबसे ज्यादा दुरूपयोग हुआ है।’

पीठ ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब जमात की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने कहा कि केन्द्र ने अपने हलफनामे में कहा है कि याचिकाकर्ता बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलना चाहते हैं। पीठ ने कहा, ‘वे अपने हलफनामे में कुछ भी कहने के लिए स्वतंत्र हैं जैसे आप अपने हिसाब से कोई भी दलील पेश करने के लिए स्वतंत्र हैं।’ हालांकि, पीठ इस बात से नाराज थी कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव की बजाय अतिरिक्त सचिव ने यह हलफनामा दाखिल किया है जिसमें तबलीगी जमात के मुद्दे पर ‘अनावश्यक’ और ‘बेतुकी’ बातें कही गई हैं।

पीठ ने सख्त लहजे में कहा, ‘आप इस न्यायालय के साथ इस तरह का सलूक नहीं कर सकते जैसा कि इस मामले में आप कर रहे हैं।’ शीर्ष अदालत ने सूचना एवं प्रसारण सचिव को एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया जिसमे इस तरह के मामलों में मीडिया की अभिप्रेरित रिपोर्टिंग को रोकने के लिये उठाए गए कदमों का विवरण हो। पीठ ने इस मामले को दो सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

इस याचिका पर सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि उसने केबल टेलीविजन नेटवर्क्स (नियमन) कानून, 1995 का अवलोकन किया है। इसकी धारा 20 जनहित में केबल टेलीविजन नेटवर्क का संचालन निषेध करने के अधिकार के बारे में है। पीठ ने कहा, ‘हम आपसे कुछ कहना चाहते हैं, इस अधिकार का इस्तेमाल टीवी कार्यक्रम के मामले में होता है लेकिन प्रसारण के सिग्नल के मामले में नहीं। यह कानून मदद नहीं करता। सरकार ने जो हलफनामा दाखिल किया है उसमे कहा है कि परामर्श जारी किये गये हैं।’

दवे ने केबल टेलीविजन कानून के तहत अधिकार का जिक्र किया और कहा कि कई बार सरकार ने सही तरीके से इस अधिकार का इस्तेमाल किया है। पीठ ने सालिसीटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि अतिरिक्त सचिव ने हलफनामा दाखिल किया है लेकिन इसमें आरोपों पर टिप्पणी नहीं की गयी है। पीठ ने कहा, ‘इसमें मूर्खतापूर्ण तर्क दिया गया है। यह जवाब देने से बचने जैसा हलफनामा है।’

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