Monday, June 21, 2021

 

 

 

अशोका यूनिवर्सिटी के संस्थापकों के इस्तीफे पर बोले रघुराम राजन – अपनी आत्मा से कर लिया समझौता

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अशोक विश्वविद्यालय से भानु प्रताप मेहता तथा अरविंद सुब्रमणयम के इस्तीफे पर भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने शुक्रवार को कहा कि अशोका यूनिवर्सिटी के फाउंडर्स ने अपनी आत्मा से समझौता किया है। उन्होंने कहा, अभिव्यक्ति की आजादी अशोका यूनिवर्सिटी की आत्मा है, लेकिन क्या अपनी आत्मा को बेचने से ‘दबाव समाप्त हो जाएगा।

‘लिंक्डइन’ पर पोस्ट में राजन ने कहा कि भारत में इस सप्ताह अभिव्यक्ति की आजादी को गंभीर झटका लगा है। देश के बेहतरीन राजनीतिक टिप्पणीकार प्रोफेसर मेहता ने अशोका यूनिवर्सिटी से इस्तीफा दे दिया है। राजन ने कहा, ”सच्चाई यह है कि प्रोफेसर मेहता किसी संस्थान के लिए ‘कांटा’ थे। वह कोई साधारण कांटा नहीं हैं, बल्कि वह सरकार में उच्च पदों पर बैठे लोगों के लिए अपनी जबर्दस्त दलीलों से कांटा बने हुए थे।”

अशोक विश्वविद्यालय में हालिया घटनाक्रमों पर शिकॉगो विश्वविद्यालय, बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस के प्रोफेसर राजन ने कहा, ”अभिव्यक्ति की आजादी इस महान विश्विविद्यालय की आत्मा है। इसपर समझौता कर विश्वविद्यालय के संस्थापकों ने आत्मा को चोट पहुंचाई है। उन्होंने कहा, ”यदि आप अपनी आत्मा को ‘बेचने की मंशा रखते हैं, तो क्या इससे दबाव समाप्त हो जाएगा। यह निश्चित रूप से भारत के लिए एक बुरा घटनाक्रम है।  मेहता के इस्तीफे के बाद प्रोफेसर सुब्रमणयम ने भी विश्विविद्यालय से इस्तीफा दे दिया था।

राजन ने सुब्रमण्यम के इस्तीफे की कुछ पंक्तियों का भी जिक्र किया है। इसमें कहा गया है, ”यहां तक कि अशोका, जो निजी यूनिवर्सिटी है और यह निजी पूंजी के जरिए संचालित है, वहां भी अकादमिक अभिव्यक्ति की आजादी नहीं है, जो काफी परेशान करने वाली चीज है।”

राजन ने कहा, ‘‘यदि यूनिवर्सिटी के फाउंडर्स को लगता है कि उन्होंने यूनिवर्सिटी के हित में शक्तिशाली लोगों से समझौता किया है, तो वे गलत हैं।” राजन ने कहा, ऐसा नहीं है कि मेहता विपक्ष के साथ सहानुभूति रखते हैं। एक सच्चे शिक्षाविद की तरह वह उनकी भी इसी तरह से आलोचना करते हैं।

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