भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा की और से आर्थिक नीतियों पर घिरी मोदी सरकार की भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर यज्ञ वेणुगोपाल रेड्डी ने इशारों ही इशारों में आलोचना कर मुसीबत बड़ा दी है.

अमेरिकी थिंक टैंक हडसन इंस्टीट्यूट के एक प्रोग्राम के संबोधन के दौरान वेणुगोपाल रेड्डी ने कहा है कि 1990 से 2014 के बीच भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ सबसे ज्यादा अच्छी रही. और ये कोएलिशन गवर्नमेंट्स (गठबंधन सरकारों) का दौर था. इसलिए, ये कहा जा सकता है कि शायद बहुमत वाली मजबूत सरकार की जगह गठबंधन सरकारें बेहतर इकोनॉमिक ग्रोथ दे सकती हैं.

उन्होंने वर्ष 1991 में भारत के भुगतान संकट का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि अस्थिर राजनीतिक हालातों के बावजूद उन्होंने, जो कदम उठाए जाने की जरुरत थी उनके लिए एक आम राजनीतिक सहमति बनायी और इसका सफलतापूर्वक प्रबंधन किया.

2008 के विश्व आर्थिक संकट बारें में बात करते हुए उन्होंने कहा, ये अभी टला नहीं है. आप शॉर्ट टर्म में हालात को बेहतर मान सकते हैं, ये दिखते भी हैं. लेकिन, मीडियम टर्म में इन पर सवालिया निशान लग जाता है. अगले 10 साल में जियो-पॉलिटिकल सिचुएशन में बड़े बदलाव हो सकते हैं. सरकारों को पॉलिसी जनता के हिसाब से पाॅलिसी बनानी पड़ेंगी.

आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने कहा, अगले 10 से 15 साल में डेमोग्राफिक और टेक्नोलॉजिकल बदलाव होंगे लेकिन इसके साथ ही एनवॉयरमेंटल इश्यूज का डर भी बना रहेगा. ये ही दुनिया के सामने सबसे बड़े तीन चैलेंज रहेंगे.

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