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महान अर्थशास्त्री और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह शिक्षण के क्षेत्र में फिर से लोट कर प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाये पंजाब यूनिवर्सिटी को देंगे.

दरअसल पंजाब विश्वविद्यालय ने पूर्व प्रधानमंत्री को जवाहर लाल नेहरू चेयर प्रोफेसरशिप की पेशकश की थी जिसकी मंजूरी  संयुक्त समिति द्वारा मिल चुकी हैं. संयुक्त समिति द्वारा लोकसभा अध्यक्ष को सौंपी रिपोर्ट में कहा गया है कि संसद सदस्य रहते यह पद लाभ के पद के दायरे में नहीं आता.

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मनमोहन सिंह ने जुलाई में प्रोफेसरशिप की पेशकश मिलने के बाद राज्यसभा के सभापति से सम्पर्क कर राय मांगी थी कि विश्वविद्यालय की पेशकश लाभ के पद संबंधी संविधान के अनुच्छेद 102 (ए) के प्रावधानों के तहत उल्लंघन तो नहीं होगा? दरअसल संसद सदस्य रहते हुए कोई भी सांसद लाभ पद स्वीकार नहीं कर सकता. और पूर्व प्रधानमंत्री असम से राज्यसभा सदस्य हैं.

लाभ के पद संबंधी संयुक्त समिति द्वारा लोकसभा अध्यक्ष को सौंपी रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर पूर्व प्रधानमंत्री इस पेशकश को स्वीकार करते हैं तो यह किसी तरह से भी लाभ के पद के दायरे में नहीं आयेगा और संसद सदस्य के रूप में आयोग्यता नहीं होगी.

गौरतलब रहें कि मनमोहन सिंह पंजाब विश्वविद्यालय के छात्र भी रह चुके हैं और उन्होंने यहाँ शिक्षण के क्षेत्र में भी अपनी सेवाए दी हैं. उन्होंने यहीं से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की थी और 1963 से 1965 के बीच वहां अर्थशास्त्र पढ़ाया भी था.

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