Saturday, June 12, 2021

 

 

 

NRC ड्राफ्ट: उल्फा प्रमुख का नाम शामिल लेकिन पूर्व राष्ट्रपति के परिजनों का नहीं

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असम में जारी हुए एनआरसी ड्राफ्ट से 40 लाख से ज्यादा लोग अवैध घोषित कर दिए गए हैं। अब बिना नागरिकता प्रमाणित किए हुए ये भारत के अवैध नागरिक है। इस ड्राफ्ट को लेकर सियासी घमासान जारी है। विपक्ष का आरोप है कि ये बांटो और राज करो की नीति के तहत किया जा रहा है।

इसी बीच इस ड्राफ्ट पर उठ रहे सवालों को उस वक्त मजबूती मिल गई। जब लिस्ट में भारत के पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के परिवार के लोगों का नाम शामिल न होने के बारे खुलासा हुआ है। लिस्ट में उनके बड़े भाई एकरामुद्दीन अली अहमद के परिवार का नाम नहीं हैं।

पूर्व राष्ट्रपति के भतीजे जियाउद्दीन अली अहमद ने बताया कि एनसीआर में उनके नाम शामिल नहीं है। उन्होंने बताया कि वे इस संबंध में जरूरी दस्तावेज जमा नहीं कर पाए थे। उन्होंने बताया कि वह इस मामले में सरकार से अपील करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी सुनवाई जरूर करेगी।

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एकरामुद्दीन अली अहमद का परिवार असम के कामरुप जिले में रंगिया गांव में रहता है। वहीं दूसरी और असम के उग्रवादी संगठन यूनाइटेड लिब्रेशन फ्रंट ऑफ असम यानी उल्फा के चीफ परेश बरुआ का नाम एनसीआर में शामिल हैं और उनकी पत्नी तथा दोनों बेटों के नाम नहीं हैं। जबकि बरुआ एक लंबे समय से भूमिगत हैं।

प्रशासन की ओर से कहा जा रहा है कि एनआरसी ड्राफ्ट में जिन लोगों के नाम छूट गए है उन्हें जरूरी दस्तावेज मुहैया कराने के लिए मौका दिया जाएगा। हालांकि ऐसे बहुत से लोगों को यह चिंता सता रही है कि बाढ़ और अन्य आपदा में उनके जरूरी दस्तावेज गायब हो चुके हैं।

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