30 साल पुराने मौ’त के मामले में पूर्व आईपीएस संजीव भट्ट को उम्रकैद

5:49 pm Published by:-Hindi News
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गुजरात के बर्खास्त आईपीएस ऑफिसर संजीव भट्ट को जामनगर कोर्ट ने 30 साल पहले हिरासत में हुई एक मौत के मामले में दोषी क़रार देते हुए उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई है।

दरअसल, 1990 में जामनगर में भारत बंद के दौरान हिंसा हुई थी। भट्ट उस वक्त जामनगर के एएसपी थे। इस दौरान 133 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया, जिनमें 25 लोग घायल हुए थे और आठ लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और इनमें से एक व्यक्ति की रिहा किए जाने के बाद अस्पताल में मौत हो गई थी।

प्रभुदास के भाई अमरुत वैष्णवी ने संजीव भट्ट के ख़िलाफ़ मुक़दमा किया था और उन्होंने हिरासत में प्रताड़ना के आरोप लगाए थे।लेकिन गुजरात सरकार ने मुकदमा चलाने की इजाजत नहीं दी। 2011 में राज्य सरकार ने भट्ट के खिलाफ ट्रायल की अनुमति दे दी। इस मामले में एक और पुलिस ऑफिसर प्रवीण सिंह झाला को भी आजीवन कारावास की सज़ा मिली है।

इतना ही नहीं भट्ट को 2011 में बिना अनुमति के ड्यूटी से नदारद रहने और सरकारी गाड़ियों का दुरुपयोग करने के आरोप में भी निलंबित कर दिया गया था और बाद में अगस्त 2015 में उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। इससे पहले 1998 के मादक पदार्थ से जुडे़ एक मामले में भी भट्ट गिरफ्तार हुए थे। तब संजीव भट्ट को पालनपुर में मादक पदार्थों की खेती के एक मामले में छह अन्य लोगों के साथ अरेस्‍ट किया गया था। 1998 में संजीव भट्ट बनासकांठा के डीसीपी थे।

संजीव भट्ट गुजरात काडर के आईपीएस अधिकारी हैं जिन्होंने 2002 में गुजरात दंगों में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका पर सवाल खड़े किए थे। 2015 में गुजरात सरकार ने निलंबित आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को बर्खास्त कर दिया था।

संजीव राजेंद्र भट्ट सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दायर करने के बाद सुर्ख़ियों में आ गए थे। इस हलफ़नामे में उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाए थे और कहा था कि गुजरात में वर्ष 2002 में हुए दंगों की जाँच के लिए गठित विशेष जाँच दल (एसआईटी) में उन्हें भरोसा नहीं है।

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