Thursday, October 28, 2021

 

 

 

सीबीआई के पूर्व अंतरिम चीफ को SC ने दी कोने में बैठे रहने की सजा, लगाया 1 लाख का जुर्माना

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नई दिल्ली: बिहार शेल्टर होम मामले में सुप्रीम कोर्ट के अवमानना का सामना कर रहे सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव को कोर्ट ने अनोखी सजा सुनाई और उन्हें दिन भर के लिए कोर्ट के एक कोने में बैठने की सजा दी। इसके बाद अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट से जाकर आग्रह किया कि CBI के पूर्व अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव ने काफी सज़ा भुगत ली है, अब उन्हें जाने दिया जाए।

कोर्ट ने कहा, ‘यह आपका दंड है…आपसे कहा गया है, कोर्ट उठने तक बैठे रहें…क्या आप चाहते हैं कि हम कल कोर्ट उठने तक आपकी सज़ा बढ़ा दें…?” कोर्ट के सख्त रुख के बाद नागेश्वर राव और भासुरन चुपचाप अपनी सीट पर आकर बैठ गए. हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट के स्थगित होने बाद नागेश्वर राव सजा पूरी करके कोर्ट से बाहर निकल गए।

क्या है मामला दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले की सीबीआई जांच में SC की अनुमति के बिना जांच टीम में शामिल किसी भी अधिकारी का ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। इसके बाद भी नागेश्वर राव ने जांच टीम के चीफ सीबीआई अधिकारी एके शर्मा का 17 जनवरी को सीबीआई से CRPF में तबादला कर दिया था। इसके बाद सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव ने बिना शर्त सुप्रीम कोर्ट से माफी मांग ली थी उन्होंने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बिना शर्त माफीनामा दाखिल कर दिया था।

कोर्ट रूम : राव बार-बार माफी मांगते रहे, लेकिन कोर्ट ने कहा- यह गंभीर मामला

चीफ जस्टिस : नागेश्वर राव को सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश का पता था, तभी उन्होंने कानूनी विभाग से राय मांगी और कानूनी सलाहकार ने कहा था कि एके शर्मा का ट्रांसफर करने से पहले सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर इजाजत मांगी जाए, लेकिन ऐसा क्यों नहीं किया गया? अटॉर्नी जनरल : राव ने गलती स्वीकारी है उन्होंने माफी मांगी है।

चीफ जस्टिस : संतुष्ट हुए बगैर और कोर्ट से पूछे बगैर अधिकारी के रिलीव ऑर्डर पर दस्तखत करते हैं यह अवमानना नहीं तो क्या है? राव ने आरके शर्मा को जांच से हटाने का फैसला लेने के बाद सुप्रीम कोर्ट को जानकारी देने की जरूरत तक नहीं समझी। उनका रवैया रहा है कि मुझे जो करना था कर दिया। अटॉर्नी जनरल : माई लार्ड, प्लीज इनको (राव) माफ कर दीजिए।

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चीफ जस्टिस (अटॉर्नी जनरल से पूछा) : अगर हम नागेश्वर राव को दोषी करार देते हैं, तो क्या आप सजा को लेकर जिरह करेंगे? अटॉर्नी जनरल : जब तक कोर्ट यह तय न कर ले कि नागेश्वर राव ने यह जानबूझकर कर किया है, उन्हें दोषी करार नहीं दिया जाना चाहिए।

चीफ जस्टिस : अगर हम राव की माफी स्वीकार भी कर लेते हैं तो भी इनका करियर रिकॉर्ड दागदार रहेगा, क्योंकि इन्होंने अदालत की अवमानना की है और यह इन्होंने खुद स्वीकार किया है। यह बहुत गंभीर मामला है। अटॉर्नी जनरल : मी लॉर्ड, इंसान गलतियों का पुतला है। राव को माफ कर दीजिए।

चीफ जस्टिस : अपने 20 साल के करियर में किसी को अवमानना मामले में सजा नहीं सुनाई, लेकिन यह मामला अलग है। अटॉर्नी जनरल : नागेश्वर राव के 32 साल के करियर का अच्छा ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। कोर्ट को उन पर दया दिखानी चाहिए। चीफ जस्टिस : नागेश्वर राव को अवमानना का दोषी करार दिया जाता है। उन्हें कोर्ट की कार्यवाही चलने तक अदालत में बैठे रहने की सजा सुनाई जाती है। साथ ही उन पर एक लाख रुपए जुर्माना लगाया जाता है। यह रकम एक सप्ताह में जमा करानी होगी।

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामला क्या है? पिछले साल मुजफ्फरपुर और पटना के शेल्टर होम में बच्चियों के यौन शोषण की बात सामने आई थी। 28 मई, 2018 को एफआईआर दर्ज हुई। 31 मई को शेल्टर होम से 46 नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया गया। इस मामले में शेल्टर होम के संचालक ब्रजेश ठाकुर, पूर्व महिला एवं बाल विकास मंत्री मंजू ठाकुर समेत 11 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। मामले की जांच सीबीआई कर रही है। हाल ही में 7 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को फटकार लगाते हुए केस पटना से दिल्ली के साकेत पास्को कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया।

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