नई दिल्ली. नोटबंदी के तीन साल पूरे होने पर आर्थिक मामलों के पूर्व सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने एक नोट जारी कर सरकार को कई अहम सलाह दी है, जिसमें दो हजार रुपये के नोट को बंद करने और पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग के निजीकरण की ओर ध्यान देने की बात कही है।

गर्ग ने कहा है कि 2000 के नोटों का बड़ा हिस्सा सर्कुलेशन में नहीं है। इनकी जमाखोरी हो रही है, इन्हें बंद कर देना चाहिए। गर्ग के मुताबिक सिस्टम में काफी ज्यादा नकदी मौजूद है। 2000 के नोट बंद करने से कोई परेशानी नहीं होगी। गौरतलब है कि सुभाष चंद्र गर्ग ने 31 अक्तूबर को ऊर्जा सचिव के पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली है। वित्त सचिव के पद से तबादले के बाद ही सुभाष चंद्र गर्ग ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन कर दिया था।

उन्होंने अपने सुझाव में कहा है कि भारत के राजकोषीय प्रबंधन सिस्टम (Fiscal Management) में “उन प्रथाओं का इस्तेमाल हो रहा है जो अच्छी और स्थिर नहीं है। इसीलिए घाटे का स्तर बना रहता है।  गर्ग ने कहा कि ज्यादा कर्ज का स्तर भारत की क्रेडिट रेटिंग के लिए बड़ी समस्या है। देश की आमदनी का एक बड़ा हिस्सा इन कर्जों को चुकाने में खर्च होता है। इसीलिए इसमें बदलाव की जरूरत है।

गर्ग ने एक भूमि प्रबंधन निगम (Land Management Corporation) बनाने का सुझाव दिया, जो कि एक प्रकार से बाहरी हस्तक्षेप से मुक्त वेल्थ फंड होगा। उन्होंने बताया कि घाटे में चल रही सार्वजनिक उपक्रमों की सभी भूमि और भवनों को इस निगम को हस्तांतरित किया जाना चाहिए। इसके अलावा गर्ग ने ऑफ बजट उधार, खाद्य एवं उर्वरक सब्सिडी के भुगतान आदि को खत्म करने की सिफारिश की है

एक आरटीआई के जवाब में सरकार की ओर से बताया गया है कि 2000 रुपये के नोटों का ज्यादातर इस्तेमाल अवैध कामों में किया जा रहा है। खास तौर पर इसका ज्यादातर इस्तेमाल स्मगलिंग के लिए किया जा रहा है। अधिकारियों ने यह भी बताया है कि उन्होंने आंध्र-तमिलनाडु सीमा पर 2,000 रुपये के नोटों के 6 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी बरामद की थी।

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