असम में नेशनल रजिस्टर आॅफ सिटिजंस (एनआरसी) को लागू करने के बाद इस मामले में भारतीय विदेश मंत्रालय की पहली बार प्रतिक्रिया सामने आई है।

इस मामले पर विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत बांग्लादेश सरकार के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है। हमने उन्हें आश्वासन दिया है कि यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार तैयार की गई सूची है, और असम के नागरिकों की पहचान प्रकिया चल रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, ‘बांग्लादेश इस मुद्दे को भारत के आंतरिक मामले के तौर पर देख रहा है।’

कुमार ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘एनआरसी का मसौदा आने से पहले और बाद में दोनों ही बार हम बांग्लादेश की सरकार से बेहद करीबी संपर्क में रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, बांग्लादेश की सरकार यह मानती है कि मौजूदा प्रक्रिया भारत का आंतरिक मसला है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है और वे (द्विपक्षीय संबंध) बहेद अच्छे हैं।

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बता दें कि देश की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में 30 जुलाई को सरकार ने असम में एनआरसी की दूसरी अंतिम लिस्ट जारी की थी। जिसमें असम के 40 लाख लोग अवैध नागरिक पाए गये थे। जिसके बाद से सियासी घमासान जारी है। इस मामले में बांगलादेश ने कहा था कि भारत में कोई भी बांग्लादेशी घुसपैठिया नहीं हैं।

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी एनआरसी की अंतिम सूची जारी होने तक असम के किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने के निर्देश दिए है। तो वहीं केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि एनआरसी की जारी की गई दूसरी सूची अंतिम सूची नहीं है और जिन लोगों के नाम इसमें छूटे हुए हैं उन्हें अपनी नागरिकता साबित करने का मौका दिया जाएगा।