छत्तीसगढ़ के नक्सलगढ़ गांव मारजूम में 30 साल में पहली बार 15 अगस्त के दिन तिरंगा लहराएगा जाएगा। दरअसल इस गाँव में नक्सली 15 अगस्त और 26 जनवरी को काला ध्वज फहराते रहे हैं। छत्तीसगढ़ बनने के बाद पहली बार अब तिरंगा फहराया जाएगा। राष्ट्रगीत गाया जाएगा।

हालांकि अब फोर्स ने इस गांव को आजाद कराया लिया है। यहां ग्रामीण और नक्सल पीड़ित दोनों परेड में शामिल होंगे। मारजूम ही नहीं बल्कि इसके पड़ोसी गांव चिकपाल, परचेली में भी राज्य गठन के बाद पहली बार तिरंगा फहराया जाएगा। पुलिस अफसरों ने बताया कि इन गांवों के 50 से ज़्यादा युवा पुलिस में जुड़कर काम कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि 15 अगस्त, 26 जनवरी के पहले गांवों में नक्सलियों की बैठकें शुरू हो जाया करती थीं। तिरंगा फहराने की मनाही करते थे। लेकिन, पहली बार है जब नक्सली बैठक नहीं ले पाए हैं।

दंतेवाड़ा एसपी डॉ अभिषेक पल्लव ने बताया कि मारजूम, चिकपाल में राज्य गठन के बाद पहली बार तिरंगा फहरेगा। कैम्प खुलने के बाद यहां के ग्रामीणों का भरोसा पुलिस व प्रशासन के प्रति बढ़ा है। नक्सली लगातार सरेंडर कर रहे हैं। यहां विकास के कामों की भी शुरुआत हुई है। चिकपाल, परचेली, बोदली में भी राष्ट्रध्वज पहली बार फहराया जाएगा। ये सभी गांव अब आजादी की ओर बढ़ रहे। आने वाले साल में ये गांव पूरी तरह नक्सल मुक्त होंगे।

पल्लव इस परेड में शामिल होने वाले थे और कई कार्यक्रम भी प्रस्तावित थे, लेकिन उनकी पत्नी व बच्चे कोरोना पाॅजिटिव हैं इसलिए वे खुद क्वारेनटाइन हो गए हैं।

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