Tuesday, June 22, 2021

 

 

 

वसीम रिज़वी के खिलाफ सिर्फ एफआईआर कर खामोश न हो, मामले की भी हो पैरवी: रिज़वान मर्चेंट

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मुंबई: अल्हाज मुहम्मद सईद नूरी की नेतृत्व में चार सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल ने एडवोकेट रिज़वान मर्चेंट से मुलाकात कर वसीम रिज़वी के खिलाफ देश भर में दर्ज हुई एफआईआर की जानकारी दी। प्रतिनिधि मंडल में से इरफान शेख द्वारा बताया गया कि बरेली शरीफ यूपी, अकोला महाराष्ट्र, हैदराबाद तेलंगाना, और डोंगरी मुंबई में एफआईआर दर्ज कराई गई।

एफआईआर पर संतुष्टि जताते हुए एडवोकेट इरफान मर्चेंट ने कहा कि अब एफआईआर के बाद हमारा अगला कदम खामोश हो जाने के बजाय मामले की संजीदगी के साथ पैरवी करना है। साथ ही ऐसे मामलों में आरोपियों के खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई कराना है।

उन्होने कहा कि वसीम रिज़वी के बयान और कृत्यों से देश की आंतरिक सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा है। देश की दूसरी सबसे बड़ी आबादी की भावनाओं से खिलवाड़ करने से लॉ एंड ऑर्डर की समस्या पैदा हो रही है। यदि मुल्क में खून खराबा हो जाये तो देश की शांति और सौहार्द खत्म हो सकता है। ऐसे में वसीम रिज़वी को रासुका के तहत कार्रवाई कर जेल भेजा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वसीम रिज़वी ने न केवल सहाबा ए किराम की शान में गुस्ताखी की बल्कि हजरत आइशा सिद्दीका पर फ़िल्म बनाकर मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। बाबरी मस्जिद विवाद में भी फ़िल्म बनाकर मुसलमानों को भड़काने का काम किया।

एडवोकेट मर्चेंट ने कहा कि वसीम रिज़वी किसी देश विरोधी गुप्त एजेंडे के तहत मुल्क को दंगे-फसाद में झोंकने की साजिशों में लगा हुआ है। इसके लिए अब उसने क़ुरान पर याचिका दाखिल कर सुप्रीम कोर्ट का इस्तेमाल किया है। जिसके परिणामस्वरूप भारत की विदेशो में आलोचना हो रही है। और विशेषकर मुस्लिम देशों के साथ सबंधो पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया के मुसलमानों का ईमान है कि क़ुरान एक आसमानी किताब है। जिसमे आज तक कोई परिवर्तन नही हुआ हूं और नही भविष्य में किया जा सकता है। साथ ही दुनिया की किसी अदालत को ये अधिकार हासिल है कि वह क़ुरान के एक नुक़्ता (बिंदी) को बदल दें।

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