Sunday, January 23, 2022

मौलाना सज़ाद नोमानी के खिलाफ देशद्रोह का मामला धमकाने का प्रयास: PFI

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नई दिल्ली: पोपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) के अध्यक्ष ई अबुबैकर ने आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना सज़ाद नोमानी के खिलाफ दर्ज किये गए देशद्रोह का मामला दर्ज करने की कड़ी आलोचना की है. बता दे कि नोमानी के खिलाफ उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी की शिकायत पर लखनऊ के हजरतगंज थाने में आईपीसी की धारा 124ए, 153ए, 153बी और 298 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है.

वसीम रिजवी ने अपनी तहरीर में कहा कि हैदराबाद में नौ फरवरी को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक हुई थी, जिसमें बोर्ड के सदस्य एवं प्रवक्ता मौलाना सज्जाद नोमानी शामिल हुए. मौलाना सज्जाद नोमानी ने बैठक के दौरान आपत्तिजनक एवं उत्तेजक भड़काऊ भाषण दिया. भाषण के माध्यम से उन्होंने समुदाय विशेष को भड़काने की कोशिश की. उन्होंने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाते हुए देश के सौहार्दपूर्ण माहौल को बिगाडऩे हेतु आपत्तिजनक भाषण दिया.

PFI अध्यक्ष ने कहा, मौलाना नोमानी को संवैधानिक मूल्यों के प्रति अपनी अखंडता और प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता है, और उन्होंने कभी भी किसी भी धर्म या समुदाय के खिलाफ कुछ नहीं बोला है. हालांकि वह संघ परिवार की विभाजनकारी राजनीति की मुखर आलोचक रहे हैं. आरएसएस नफरत की अपनी विचारधारा की आलोचना को एक समुदाय से जोड़ रहा है.

pfii

उन्होंने कहा, ऐसा लगता है कि रिजवी आरएसएस के एक उपकरण के तौर पर काम कर रहे और संघ परिवार द्वारा योजना के तहत में आरएसएस की आलोचना करने वाले मुस्लिम नेताओं को चुप कराने के लिए डराने की कोशिश की जा रही है.

ई अबुबैकर ने संविधान द्वारा गारंटीकृत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए यह एफआईआर हानिकारक है. हम मौलाना नोमानी के साथ हमारी एकजुटता व्यक्त करते हैं. आरएसएस को मुस्लिम नेताओं को बदनाम करने के लिए रिजवी जैसे व्यक्तियों का इस्तेमाल करना बंद करना होगा.

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