श्रीनगर | जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारुख अब्दुल्ला आजकल कुछ बदले बदले नजर आ रहे है. वो आजकल अलगावादियों की जुबान बोलते नजर आ रहे है. उनकी नजर में सेना पर पत्थर मारने वाले युवा , अपने देश की लिए लड़ रहे है वही सेना की गोलियों से मरने वाले आतंकवादी अपने देश की आजादी लिए कुर्बानी दे रहे है. इन बयानों पर पहले भी काफी विवाद हुआ है लेकिन वो लगातार ऐसे बयान दे रहे है.

बुधवार को उन्होंने मोदी के उस बयान पर तंज कसा जिसमे उन्होंने कहा था की कश्मीरी युवाओ को टेररिज्म और टूरिज्म में से एक को चुनना होगा. इस पर फारुख ने कहा की कश्मीर में जो बच्चे पत्थर मरते है , उनका टूरिज्म से कोई लेना देना नही है , वो अपने देश के लिए लड़ रहे है. इस दौरान फारुख ने कश्मीर पर अमेरिका के मध्यस्ता प्रस्ताव पर भी प्रतिक्रिया दी.

उन्होंने कहा की अगर भारत-पाकिस्तान मिलकर कश्मीर मुद्दे को नही सुलझा पा रहे है तो अमेरिका को बीच में आकर समझौता करना चाहिए. फारुख ने आगे कहा की यह लड़ाई किसी पार्टी की नही है बल्कि संप्रदायिकता के खिलाफ जंग है. हालाँकि फारुक के बयान पर AIMIM चीफ असुदुद्दीन ओवैसी ने ऐतराज जताया है. उन्होंने कश्मीर मुद्दे पर अमेरिका की मध्यस्ता की जरुरत से भी इनकार किया है.

उन्होंने कहा की चुनाव लड़ने के लिए फारुख साहब ऐसी बाते कर रहे है. वो शायद भूल रहे है की उनके बेटे की सरकार में 100 से ज्यादा लडको की मौत हुई, तब वो खामोश रहे. लेकिन अब चूँकि उन्हें चुनाव लड़ना है इसलिए वो इस तरह की बाते कर रहे है. अमेरिकी की मध्यस्ता पर उन्होंने कहा की कश्मीर , भारत और पाकिस्तान का मुद्दा है, इसमें किसी तीसरे की जरूरत नही है.

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