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केंद्र की मोदी सरकार किसानों के मुद्दों पर चौतरफा घिरी हुई है। बीजेपी शासित राज्यों मे विशेषकर महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश मे किसानों की आत्महत्या एक बड़ा मुद्दा है। ऐसे मे बीते दो सालों से एनसीआरबी किसानों की आत्महत्या का आंकड़ा जारी नहीं कर रही।

एनसीआरबी की वेबसाइट पर किसानों की आत्महत्या से संबंधित पिछले आंकड़े 2015 तक के ही उपलब्ध हैं। यानि एनसीआरबी ने 2016 और 2017 के किसानों की आत्महत्या के आंकड़े जारी नहीं किए।

बता दें कि एनसीआरबी पर पूरे देश में किसानों के आत्महत्या का डेटा इकट्ठा करने और उसे संक्षेप में पेश करने की जिम्मेदारी है।  एनसीआरबी ने 2016 और 2017 में किसानों की आत्महत्या और किसानों के बड़े आंदोलनों को अपने डेटा में शामिल ही नहीं किया।

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आकड़ों के अनुसार, 2015 में 8007 किसानों और 4595 खेती-किसानी में लगे मजदूरों ने आत्महत्या की थी। वहीं 2014 में 5650 किसानों और 6710  कृषि मजदूरों ने आत्महत्या की थी।

हालांकि कुछ दिनों के बाद गृहमंत्रालय ने 2016 में किसान आत्महत्या पर एक अस्थायी रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें कहा गया था कि 6351 किसानों और 5019 कृषि मजदूरों मे आत्महत्या की। अस्थाई रिपोर्ट में आत्महत्या के कारणों के बारे में बात नहीं की गई थी।

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