नए कृषि कानूनों को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच मोदी सरकार की और से किसानों को नए कृषि कानूनों के अमल पर 18 महीने तक रोक लगाने  का प्रस्ताव दिया गया है।  बुधवार को 10वें दौर की वार्ता में ये प्रस्ताव दिया गया। अब अगली बैठक 22 जनवरी को होगी, जिसमें किसान संगठनों के नेता अपनी राय से अवगत कराएंगे।

किसान यूनियनों के 10वें दौर की वार्ता के बाद केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, सरकार एक से डेढ़ साल तक नए कानून के क्रियान्वयन को स्थगित करने के लिए सहमत है। इस दौरान किसान और सरकार के प्रतिनिधि मिलकर समस्याओं का हल खोजें और जो समाधान हो उसको आगे बढ़ाया जाए।

वहीं बैठक के बाद किसान संगठनों ने कहा, ‘सरकार ने कहा है कि हम कोर्ट में हलफनामा देकर कानूनों को 1.5-2 साल तक स्थगित रख सकते हैं। समिति बनाकर, चर्चा कर, जो रिपोर्ट देगी, हम उसको लागू करेंगे।’ हालांकि इस प्रस्ताव का किसान संगठनों ने तुरंत समर्थन नहीं किया।

बैठक की जानकारी देते हुए किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा, ‘आज की बैठक में कोई समाधान नहीं निकला। हम अगली तारीख को फिर मिलेंगे।’ टिकैत ने कहा कि किसान संगठन के नेताओं ने किसानों को एनआइए की नोटिस का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा, ‘सरकार ने कुछ संशोधनों का प्रस्ताव दिया लेकिन किसान संगठनों ने स्पष्ट कर दिया कि उन्हें तीनों कानूनों को निरस्त करने से कम पर कुछ मंजूर नहीं है।’

किसान प्रतिनिधियों के साथ बैठक में कृषि मंत्री तोमर के अलावा उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री सोम प्रकाश शामिल रहे।

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