Tuesday, June 22, 2021

 

 

 

उज्जैन: मंडियों में मटर बिकी 4-5 रुपये किलो, किसानों ने वाहनों पर उतारा गुस्सा

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नए कृषि कानूनों के खिलाफ जारी आंदोलन के बीच मध्य प्रदेश के उज्जैन में मंडियों में मटर के 4-5 रुपये किलो बिकने से नाराज किसानों ने उग्र प्रदर्शन करते हुए वाहनों में जमकर तोड़फोड़ की। नाराज़ किसानों ने कई घंटों तक खाचरौद मंडी बंद कर चक्का जाम कर दिया।

बता दें कि बड़नगर तथा खाचरौद तहसील में मटर का सर्वाधिक उत्पादन हुआ है। किसानों का कहना है कि हर साल 30 से 40 रुपये किलो बिकने वाला मटर इस बार काफी कम भाव में बिक रहा है। किसानों के अनुसार उत्पादन की लागत करीब 8 से 10 किलो रहती है। वर्तमान भाव में काफी नुकसानी है।

किसानों का आरोप था कि अन्य प्रदेशों में व्यापारी 27 रुपये प्रति किलो मटर फली बेच रहे हैं वहीं किसानों से 5 रुपये से लेकर 12 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदी की जा रही है।

शनिवार को किसानों ने चक्का जाम कर दिया और खाचरोद से दूसरे राज्यों में मटर का परिवहन कर रही ट्रांसपोर्ट की गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई। तीन थानों की पुलिस ने पहुंचकर मोर्चा संभाला। दोपहर 2 बजे से जारी हंगामा देर शाम 5 बजे तक चलता रहा।

उद्यानिकी विभाग के अधिकारी सुभाष श्रीवास्तव बताते हैं कि जिले से करीब 200 ट्रक हरे मटर की खपत प्रतिदिन देशावर में होती है जो कि हड़ताल के कारण जाम हो गई है। नतीजतन भाव में भारी कमी आ गई है। किसानों को लागत निकालना मुश्किल पड़ रहा है।

श्रीवास्तव के अनुसार मालवा में पीएफएम 3 तथा गोल्डन 10 क्वालिटी की हरी मटर का उत्पादन अधिक होता है, जो सिर्फ सब्जी में काम आती है। इस मटर की गुजरात, महाराष्ट्र तथा दिल्ली के आसपास क्षेत्र में काफी मांग रहती है। हड़ताल के कारण निर्यात नहीं हो पा रहा है।

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