तीन कृषि कानूनों के खिलाफ अब उन 2000 महिलाओं ने भी मोर्चा खोल दिया है। जिनके बेटे,भाई, पति और पिता कर्ज की वजह से खुदकुशी करने पर मजबूर हुए। ये महिलाएं परिजनों के फोटो लेकर धरने में शामिल हुई।

भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्रहण) की उपाध्यक्ष हरिदंर कौर बिंदू ने बताया,‘‘करीब 700-800 महिलाएं जिनके परिवार के सदस्यों ने कृषि ऋण की वजह से आत्महत्या की थी, प्रदर्शन में शामिल हुईं।’’ उन्होंने बताया कि ये महिलाएं मनसा, बठिंडा, पटियाला और संगरूर सहित पंजाब के विभिन्न जिलों से आई हैं।

बिंदू ने दावा किया, ‘‘हम रेखांकित करना चाहते हैं कि नए कृषि कानूनों से राज्य में किसानों द्वारा आत्महत्या करने की संख्या और बढ़ सकती है। ये कानून कृषि समुदाय के हित में नहीं है और ये कृषि क्षेत्र को बर्बाद कर देंगे।’’

भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्रहण) के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलान ने कहा कि हम रेखांकित करना चाहते हैं कि कैसे कर्ज में दबे पंजाब के किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया, ‘‘एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2006 से अबतक पंजाब में करीब 50 हजार आत्महत्या की घटनाएं हुयी है।’’

पटियाला जिले से आईं 50 वर्षीय परमजीत कौर ने कहा, ‘‘केंद्र द्वारा लाए गए कृषि कानून, किसानों को और कर्ज के जाल में ढकेलेंगे।’’ कौर के पति ने नौ साल पहले आत्महत्या कर ली थी और परिवार के पास नाममात्र की जमीन है। वहीं पटियाला की 65 वर्षीय मोहिंदर कौर ने बताया कि उनके 19 वर्षीय पोते ने पांच साल पहले आत्महत्या कर ली थी क्योंकि परिवार उसकी पढ़ाई का खर्च नहीं उठा पा रहा था।

BKU ने कहा है कि किसानों के बारे में यह डाटा भी इकट्ठा किया जा रहा है कि उनके परिवार को कोई मुआवजा मिला या नहीं। साथ ही उन पर कितने का ऋण था और उनके पास कितनी जमीन थी। उग्राहन समूह वाले BKU उपाध्यक्ष झंडा सिंह जेठुके ने कहा कि सरकार पंजाब में किसानों की तस्वीर बहुत अच्छी दिख रहा ही, लेकिन असलियत कुछ और ही है। उन्होंने कहा कि विधवा महिलाएं अपनी जिंदगी की दास्तां बताएंगी।