तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में आज गणतंत्र दिवस पर देश की राजधानी में किसानों ने ट्रैक्टर रैली का आयोजन किया। लेकिन ये ट्रैक्टर रैली हिंसक हो गई। पूर्व निर्धारित मार्ग से हटकर प्रदर्शनकारी किसान ट्रैक्टरों से लाल किले पहुंचे और लाल क़िले की प्राचीर पर अपना झंडा (निशान साहिब या निशान साहेब) फहराया।

निशान साहिब या निशान साहब सिखों का पवित्र त्रिकोणीय ध्वज है। इसे हर गुरुद्वारे के बाहर फहराया जाता है। झंडे के केंद्र में एक खंडा चिह्न (☬) होता है। निशान साहिब खालसा पंथ का परंपरागत प्रतीक है। किसी भी जगह पर इसके फहराने का मतलब उस मोहल्ले में खालसा पंथ की मौजूदगी का प्रतीक माना जाता है।

केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि आंदोलनकारियों को लालक़िले से दूर रहना चाहिए था। उन्होंने कहा, ”लालकिला हमारे लोकतंत्र की मर्यादा का प्रतीक है, आंदोलनकारियों को लालक़िले से दूर रहना चाहिए था। इसकी मर्यादा उल्लंघन की मैं निंदा करता हूं। यह दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है।”

कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने इस व्‍यवहार की जमकर आलोचना की है। उन्‍होंने कहा कि यद्यपि के किसानों के आंदोलन के समर्थन में हैं लेकिन अराजकता को बर्दाश्‍त नहीं कर सकते। थरूर ने एक ट्वीट में लिखा, ‘बेहद दुर्भाग्‍यपूर्ण…मैंने किसानों को विरोध प्रदर्शन का शुरुआत से ही समर्थन किया है लेकिन मैं अराजकता को सहन नहीं कर सकता और गणतंत्र दिवस पर कोई और झंडा नहीं, लाल किले पर केवल तिरंगा लहराया जाना चाहिए।’

शिवसेना के सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) ने इस मामले में केंद्र सरकार को आड़े हाथ लिया है। उन्‍होंने कहा कि सरकार ने आखिर तक प्रदर्शनकारी किसानों की बात नहीं सुनी। उन्‍होंने ट्वीट किया, ‘क्‍या सरकार इस दिन का इंतजार कर रही थी? केंद्र सरकार ने आखिर तक लाखों किसानों की बात नहीं सुनी। हमारे देश में यह किस तरह का लोकतंत्र फल-फूल रहा है? यह लोकतंत्र नहीं है भाई….कुछ और चल रहा है। जयहिंद’

इसी बीच किसान संयुक्त मोर्चा ने भी हिंसा की निंदा करते हुए खुद को अलग कर लिया है। साथ ही ट्रैक्टर रैली में भाग लेने वाले लोगों को धन्यवाद दिया है।